-मछली पालन, खेती और आजीविका गतिविधियों से सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर बनीं अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा
पुकार बाफना/बीजापुर 20 जुलाई 2026- विकासखण्ड भोपालपटनम से लगभग 24 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम कोनागुड़ा की श्रीमती गंगूबाई तलाण्डी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। कभी घर के कामकाज तक सीमित रहने वाली गंगूबाई अपने परिवार की आय के लिए पूरी तरह अन्य सदस्यों पर निर्भर थीं। सीमित आय और बढ़ते खर्चों के कारण परिवार का भरण-पोषण करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा था।
इसी दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत संगमपल्ली क्लस्टर के ग्राम कोनागुड़ा स्थित लक्ष्मी स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया। समूह के माध्यम से उन्हें आजीविका गतिविधियों को बढ़ाने का अवसर मिला। मत्स्य विभाग से मछली पालन के लिए 5 किलोग्राम मत्स्य बीज तथा कृषि विभाग से धान की खेती के लिए बीज उपलब्ध कराया गया, जिससे उन्होंने अपनी आय के नए स्रोत विकसित किए।
आज गंगूबाई तलाण्डी विभिन्न आजीविका गतिविधियों से उल्लेखनीय आय अर्जित कर रही हैं।
मछली पालन से लगभग 7 हजार रुपये, धान की खेती से 80 हजार रुपये, तेंदूपत्ता संग्रहण से 6 हजार रुपये, महुआ संग्रहण से 6 हजार रुपये, मनरेगा मजदूरी से 6 हजार रुपये तथा सब्जी-बाड़ी से 5 हजार रुपये की आय प्राप्त कर रही हैं। इस प्रकार वे सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं।
प्रशासन एवं विभिन्न विभागों के सहयोग से गंगूबाई न केवल अपने परिवार का जीवन स्तर बेहतर बनाने में सफल हुई हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि स्व सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जा सकता है।
समूह ने बदली जिंदगी -गंगूबाई
गंगूबाई तलाण्डी बताती हैं कि स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन को नई दिशा मिली है। अब वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी निभा रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका कहना है कि समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास भी दिया है। इस अवसर पर उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में वास्तविक परिवर्तन संभव हो रहा है।







