-कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से की अपील, समय पर करें कृषि कार्य और तकनीकी उपाय अपनाकर बढ़ाएं उत्पादन
किसान हित में संयुक्त जन जागरूकता अभियान के तहत वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर खरे (सस्यविज्ञान) एवं प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी जितेंद्र कुमार खरे द्वारा अगस्त माह में किए जाने वाले प्रमुख कृषि कार्यों को लेकर किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की गई है। यह अभियान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं महान समाज सेवक स्व. हिंच्छाराम खरे, स्व. गणेशराम खरे तथा महान देहदानी स्व. मनोज कुमार खरे की स्मृति में संचालित किया जा रहा है।
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि अगस्त माह खरीफ फसलों की देखभाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान किसान यदि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाते हैं तो फसलों की अच्छी वृद्धि के साथ उत्पादन में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
धान फसल में रोपाई, पोषण और सिंचाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह
किसानों को सलाह दी गई है कि यदि किसी कारणवश धान की रोपाई में देरी हो गई है तो पौधों की दूरी कम रखते हुए 3 से 4 पौधों का उपयोग करें। धान की विभिन्न अवस्थाओं में अनुशंसित मात्रा के अनुसार नाइट्रोजन का छिड़काव करना चाहिए।
यूरिया का उपयोग करने से पहले खेत में पानी की मात्रा कम कर देना चाहिए, जिससे खाद का बेहतर उपयोग हो सके। धान के खेत में फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई व्यवस्था बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।
खरपतवार नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक उपाय अपनाएं किसान
खरीफ धान की बुवाई एवं रोपाई का कार्य जिले में जारी है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेतों को खरपतवार मुक्त रखने के लिए उचित खरपतवार नाशकों के उपयोग की सलाह दी है।
अंकुरण पूर्व खरपतवार नियंत्रण के लिए पायरेजोसल्फ्यूरान इथाइल 10 प्रतिशत डब्ल्यूपी का उपयोग बोता धान में बुवाई के 0 से 3 दिन के भीतर 80 ग्राम प्रति एकड़ की दर से किया जा सकता है। इसी तरह प्रेटीलाक्लोर 6 प्रतिशत प्लस बेनसलफ्यूरान इथाइल 0.6 प्रतिशत दानेदार खरपतवार नाशी का उपयोग 4 किलो प्रति एकड़ की दर से करने की सलाह दी गई है।
ऑक्साइडायजिल 6 प्रतिशत ईसी का उपयोग सावा, चूहका, नरजवा सहित कुछ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए बुवाई पूर्व 600 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से किया जा सकता है।
अंकुरण के बाद खरपतवार नियंत्रण के लिए भी दिए सुझाव
धान में अंकुरण के बाद खरपतवार नियंत्रण के लिए पायरेजोसल्फ्यूरान इथाइल 10 प्रतिशत डब्ल्यूपी का उपयोग बुवाई या रोपाई के 5 से 10 दिन बाद 80 ग्राम प्रति एकड़ की दर से करने की सलाह दी गई है।
बीसपायरीबैक सोडियम 10 प्रतिशत एससी का उपयोग मोथा, नरजवा, बंदरपुछिया, सावा सहित विभिन्न खरपतवारों के नियंत्रण के लिए बुवाई या रोपाई के 20 से 25 दिन बाद 100 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से किया जा सकता है।
इसके अलावा पेनॉक्सुलम 21.7 प्रतिशत एससी, फिनॉक्साप्रोप-पी एथाइल 9.3 प्रतिशत ईसी तथा सायहेलोफाप ब्यूटाइल 10 प्रतिशत ईसी जैसे खरपतवार नाशकों के उपयोग की भी जानकारी दी गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि किसी भी दवा का उपयोग कृषि विशेषज्ञों की सलाह एवं निर्धारित मात्रा के अनुसार ही करें।
उद्यानिकी एवं अन्य फसलों के लिए भी जरूरी सलाह
केला फसल में वाटर सकर्स की पहचान कर समय-समय पर निकालते रहने तथा जिन पौधों में फूल या फल आ गए हैं उन्हें बांस का सहारा देने की सलाह दी गई है।
किसानों को मूंग, तिल, मक्का और ज्वार जैसी फसलों के बीजों को उपचारित कर कतार पद्धति से बुवाई करने कहा गया है। शिमला मिर्च की नर्सरी तैयार करने, खरीफ प्याज की रोपाई तथा गुलदाउदी एवं चाइना एस्टर के लिए खेत की तैयारी करने की सलाह दी गई है।
हरी काई और पशुपालन संबंधी सुझाव
धान के खेत में हरी काई का प्रकोप दिखाई देने पर अतिरिक्त पानी निकालने तथा जहां से पानी खेत में प्रवेश करता है वहां कॉपर सल्फेट को पोटली में बांधकर रखने की सलाह दी गई है।
मुर्गियों को प्रत्येक तीन माह में कृमिनाशक दवा देने की भी सलाह दी गई है, ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
डिजिटल कृषि सेवाओं का लाभ उठाने की अपील
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि वे क्रॉप डॉक्टर, राइस आईएफसी और हर्बकेल-हर्बिसाइड कैलकुलेटर जैसे कृषि उपयोगी मोबाइल एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सलाह और समय पर कृषि प्रबंधन अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। किसान जनहित और समाज हित में यह जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने की अपील की गई है।
कृषि जीवनस्य आधारम
किसानों की सेवा और कृषि जागरूकता के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा लगातार मार्गदर्शन जारी रहेगा।







