देशभर में मानसून ने एक बार फिर रौद्र रूप धारण कर लिया है। दक्षिण भारत से लेकर हिमालयी राज्यों तक भारी बारिश, भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। केरल और कर्नाटक में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश तथा भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना है। वहीं जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में बादल फटने से कई घरों और दुकानों में पानी व मलबा घुस गया। उत्तराखंड में बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा लगभग 20 मीटर तक धंस गया, जिससे आवाजाही प्रभावित हुई है।
केरल में सबसे ज्यादा तबाही, कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट
केरल में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात गंभीर बना दिए हैं। कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं, नदियां उफान पर हैं और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए आगामी दिनों में भी भारी से अति भारी वर्षा की चेतावनी दी है। 7 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।
कर्नाटक के तटीय और पहाड़ी इलाकों में खतरा
कर्नाटक के पश्चिमी घाट और तटीय जिलों में भी लगातार वर्षा से भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट मोड पर हैं।
जम्मू-कश्मीर में बादल फटा, बाजार में घुसा मलबा
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में शनिवार सुबह बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया। कई दुकानें और मकान क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि मुख्य बाजार में कीचड़, पत्थर और मलबा भर गया। सड़कें क्षतिग्रस्त होने से यातायात प्रभावित हुआ है। खराब मौसम के चलते अमरनाथ यात्रा को भी अस्थायी रूप से रोका गया।
उत्तराखंड में बद्रीनाथ हाईवे प्रभावित
उत्तराखंड में लगातार वर्षा के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाएं बढ़ रही हैं। बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के एक हिस्से के धंसने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन वैकल्पिक मार्गों और मरम्मत कार्य में जुटा हुआ है।
छत्तीसगढ़ में भी मानसून सक्रिय
छत्तीसगढ़ में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बस्तर और सरगुजा संभाग के कई जिलों में रुक-रुक कर तेज बारिश दर्ज की जा रही है। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश खरीफ फसलों के लिए लाभदायक है, लेकिन अत्यधिक वर्षा होने पर धान की फसल और ग्रामीण सड़कों को नुकसान पहुंच सकता है।
अन्य राज्यों में भी बारिश का असर
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी मानसून सक्रिय है। हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, जबकि मध्य भारत के राज्यों में नदियों और बांधों का जलस्तर बढ़ रहा है।
आगे कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण अगले एक सप्ताह तक देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। दक्षिण भारत, पश्चिमी तट, मध्य भारत और हिमालयी राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। लोगों को नदी-नालों, पहाड़ी क्षेत्रों और भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त के पहले सप्ताह में मानसून और अधिक सक्रिय रह सकता है, जिससे कई राज्यों में राहत के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।







