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“राम केवल नारों में नहीं, आचरण में बसते हैं”: राजकुमार सोनी की कविता ने दिया सच्ची भक्ति और मर्यादा का संदेश

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जो कभी राम का हुआ नहीं, वो राम की बात करते हैं,
अस्तित्व स्वीकारा नहीं, प्रभु-दर्शन की बात करते हैं।

राम तो बसते हैं सत्य, प्रेम और मर्यादा के व्यवहार में,
ये केवल जयकारे लगाकर भक्ति की बात करते हैं।

मन में छल, वाणी में मधु, चेहरे पर धर्म का आवरण,
ऐसे लोग हर दौर में श्रद्धा का व्यापार करते हैं।

राम मिले न शब्दों से, न ऊँचे-ऊँचे नारों से,
राम तो उनके होते हैं, जो जीवन राम-सा जीते हैं।

✍️: राजकुमार सोनी, नया रायपुर

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