कोरबा, 07 अगस्त 2026।
इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) के जिला अध्यक्ष शशांक दुबे ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर राज्य में आवारा एवं निराश्रित पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए तत्काल मुआवजा नियम (Compensation Mechanism) बनाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र एवं सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि आवारा/बोवाइन (गौवंश) पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों एवं घायलों के लिए प्रभावी मुआवजा व्यवस्था विकसित की जाए। साथ ही पशुओं की अनिवार्य टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, पशु मालिकों की जवाबदेही, पशुओं को सड़कों पर छोड़ने पर नियंत्रण तथा प्रत्येक संबंधित विभाग में नोडल अधिकारी नियुक्त करने जैसे महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए गए हैं।
शशांक दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी आवारा मवेशियों के कारण सड़क दुर्घटनाओं में लगातार लोगों की जान जा रही है और अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। इसके बावजूद पीड़ितों एवं उनके परिवारों के लिए कोई स्पष्ट वैधानिक मुआवजा व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि:
– आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं के लिए अलग से मुआवजा नियम/योजना अधिसूचित की जाए।
– मृत्यु, स्थायी विकलांगता, गंभीर चोट एवं वाहन क्षति के लिए समयबद्ध मुआवजा दिया जाए।
– सभी गौवंश की अनिवार्य टैगिंग एवं डिजिटल पंजीयन किया जाए।
– पशुओं को सड़कों पर छोड़ने वाले मालिकों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
– प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं तथा प्रभावी शिकायत एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित की जाए।
– पीड़ितों के लिए एक समर्पित “स्ट्रे एनिमल एक्सीडेंट विक्टिम कम्पेनसेशन फंड” स्थापित किया जाए।
उन्होंने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश देश के सभी राज्यों पर समान रूप से लागू हैं तथा छत्तीसगढ़ सरकार को भी जनहित एवं संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन और सुरक्षा की रक्षा के लिए शीघ्र नियम बनाकर उन्हें लागू करना चाहिए।
शशांक दुबे ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि इस विषय में शीघ्र कार्रवाई करते हुए नियम अधिसूचित किए जाएं तथा जनता को सुरक्षित सड़कें और दुर्घटना पीड़ितों को न्यायसंगत एवं समयबद्ध मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।







