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रूस से तेल खरीदना भारत को पड़ सकता है भारी! अमेरिकी सीनेट ने 86-11 से पास किया बिल, 100% टैरिफ का रास्ता साफ

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अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख खरीदार देशों को दंडित करने के उद्देश्य से लाए गए एक बिल को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। इन देशों में भारत और चीन के नाम भी शामिल हैं। बिल में दावा किया गया है कि रूस के साथ इस तरह का व्यापार यूक्रेन युद्ध को जारी रखने में मदद कर रहा है। सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस विधेयक को 11 के मुकाबले 86 वोटों से मंजूरी दी है।

5 देशों में भारत और चीन के अलावा और कौन-कौन से देश हैं शामिल

ये विधेयक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस का सबसे ज्यादा आयात करने वाले 5 देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, जो रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस खरीदते हैं।

  1. चीन
  2. भारत
  3. अजरबैजान
  4. हंगरी
  5. स्लोवाकिया

पहले 500% टैरिफ लगाने की तैयारी में था अमेरिका

इससे पहले रूस के पेट्रोलियम उत्पादों के सबसे बड़े खरीदारों को दंडित करने के लिए अमेरिका की और भी ज्यादा भयानक प्लानिंग थी। पिछले साल अप्रैल में, लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने एक बिल पेश किया था, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। हालांकि, बाद में बिल में बदलाव किए गए और प्रस्तावित 500 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 5 सबसे बड़े खरीदारों के लिए 100 प्रतिशत कर दिया गया।

अमेरिकी संसद के पास है टैरिफ लगाने का अधिकार

अमेरिकी संविधान ने अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस को किसी भी देश पर टैरिफ या टैक्स लगाने का अधिकार दे रखा है। अगर अमेरिकी संसद किसी देश पर 500 प्रतिशत या इससे भी ज्यादा टैरिफ लगाने के बिल को पास कर देती है और उस बिल पर राष्ट्रपति हस्ताक्षर कर देते हैं तो ये एक पूरा कानूनी अधिकार बन जाता है।

भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगेगा या नहीं

अमेरिकी सीनेट में रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले 5 सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाला बिल पास हो गया है। हालांकि, इसे लागू होने में अभी कई प्रक्रियाएं बाकी हैं। लिहाजा, भारत या किसी भी अन्य देश पर अभी तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है। अभी कौन-कौन सी प्रक्रियाएं बाकी हैं। सीनेट में बिल पास होने के बाद अभी इसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भी पास होना होगा। जिसके बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बिल पर हस्ताक्षर करने हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में बिल पास होने के बाद, ट्रंप के हस्ताक्षर होने के बाद ये एक कानून बन जाएगा। ऐसे में भारत पर भी इसका व्यापक असर पड़ेगा।

डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में पूरा कंट्रोल

अगर रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले 5 सबसे बड़े खरीदार देशों के खिलाफ ये बिल सभी जगहों से पास होकर कानून भी बन जाता है तो ऐसी परिस्थितियों में भी 100 प्रतिशत टैरिफ तुरंत लागू नहीं होगा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय हित और भारत के साथ कूटनीतिक रिश्तों और समझौतों के आधार पर छूट भी दे सकते हैं। इसके अलावा, भारत के लिए टैरिफ में बदलाव भी किया जा सकता है। मतलब, भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का पूरा कंट्रोल डोनाल्ड ट्रंप के पास है।

बिल में ईरान प्रतिबंध अधिनियम की अवधि बढ़ाने का भी प्रस्ताव

रूस पर प्रतिबंधों के अलावा, विधेयक में 1996 के ‘ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ की अवधि 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान है। इस कानून के तहत, ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। इस द्विदलीय विधेयक को रिपब्लिकन पार्टी के नेता एवं सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट पार्टी के नेता एवं सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने प्रस्तावित किया था। ग्राहम का 11 जुलाई को निधन हो गया था।

रूस के प्रमुख नेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों को भी प्रतिबंधित करने की तैयारी

विधेयक में रूस के नेताओं और अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। इसके तहत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूस के बड़े कारोबारियों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाया गया है। मतदान के बाद सीनेटर ब्लूमेंथल ने पत्रकारों से कहा, ”हमने जो किया है, ग्राहम को उस पर गर्व होता।”

31 अगस्त को शुरू होगा प्रतिनिधि सभा का नया सत्र

ब्लूमेंथल ने कहा, ”ये बेहद कड़े प्रतिबंध और टैरिफ उन सभी को रोकेंगे जो बहादुर और स्वतंत्र लोगों के खिलाफ इस जानलेवा और आपराधिक आक्रामक युद्ध में सहभागी हैं।” ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर समेत कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने हालांकि आगाह किया है कि ये विधेयक ऐसे समय में ट्रंप को टैरिफ लगाने की नई शक्तियां देगा, जब उन्होंने टैरिफ को अपनी व्यापार नीति का प्रमुख आधार बनाया हुआ है। ये विधेयक मंजूरी के लिए अब प्रतिनिधि सभा में भेजा जाएगा, जिसका सत्र 31 अगस्त को फिर शुरू होगा।

 

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