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झारखंड में JPSC-JSSC को लेकर छात्रों का आंदोलन उग्र, अनशन पर बैठे देवेंद्र की बिगड़ी तबीयत; 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान

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रांची। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितता, OMR शीट से छेड़छाड़ और पेपर लीक के आरोपों को लेकर बड़ी संख्या में छात्र रांची में आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल देवेंद्र नाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और उनकी तबीयत अब बिगड़ गई है। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों के अनुसार उनका ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कम हो गया है तथा शरीर में पानी की कमी हो गई है।

छात्रों और सरकार के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। ऐसे में आंदोलनकारियों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव करने का ऐलान किया है।

आखिर किस बात को लेकर है पूरा विवाद?
दरअसल, छात्रों का मुख्य आक्रोश 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर है।
19 अप्रैल को हुई 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों ने OMR शीट में कथित छेड़छाड़ और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए। छात्रों का दावा है कि परीक्षा परिणाम और OMR से जुड़े कई सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी के कारण वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

1. 14वीं JPSC PT रद्द करने की मांग
आंदोलनकारी छात्रों की सबसे प्रमुख मांग 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने की है।
छात्रों का कहना है कि जब परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं तो मौजूदा परिणाम के आधार पर आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।

2. JPSC-JSSC की संदिग्ध परीक्षाओं की जांच
छात्र केवल 14वीं JPSC तक सीमित नहीं हैं। वे JPSC और JSSC की कई विवादित परीक्षाओं की जांच की मांग कर रहे हैं।
Reform Manch ने TDPL द्वारा आयोजित विभिन्न JPSC परीक्षाओं को भी जांच के दायरे में लाने और जरूरत पड़ने पर उन्हें रद्द करने की मांग रखी है। इसमें 14वीं JPSC के अलावा बैकलॉग परीक्षाएं, FRO, 11वीं-13वीं JPSC, APP आदि शामिल हैं।

3. CBI और ED से जांच
छात्रों का कहना है कि केवल राज्य स्तर की जांच से उन्हें भरोसा नहीं है। वे कथित पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं की CBI और ED से व्यापक जांच चाहते हैं।
मांग में पिछले वर्षों में हुई JPSC-JSSC की प्रमुख विवादित परीक्षाओं को भी जांच के दायरे में शामिल करने की बात कही गई है।

4. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो सिर्फ किसी एक अधिकारी पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी।
वे परीक्षा एजेंसी, आयोग के अधिकारियों और यदि जांच में सामने आए तो प्रशासनिक या अन्य स्तर के जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। Reform Manch ने जांच की रिपोर्ट अधिकतम तीन महीने में जारी करने की मांग रखी है।

5. परीक्षा प्रणाली में बड़ा सुधार
छात्रों की मांग केवल पुरानी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। वे भविष्य की भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के लिए व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
OMR में पांचवां विकल्प ‘Not Attempt’ देने की मांग
परीक्षा का वार्षिक कैलेंडर जारी करना
कटऑफ और अंक सार्वजनिक करना
Original और Normalised Marks वाला Score Card देना
Normalisation का फार्मूला सार्वजनिक करना
OMR और उत्तर पुस्तिकाओं को तय समय में ऑनलाइन उपलब्ध कराना
परीक्षा एजेंसियों की भूमिका सीमित करना
परीक्षा संबंधी बदलावों की आधिकारिक सूचना समय पर देना शामिल है।

उम्र सीमा को लेकर भी नाराजगी
छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाएं समय पर नहीं होने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की उम्र सरकारी नौकरी की निर्धारित सीमा के करीब पहुंच रही है या निकल रही है।
इसी कारण आंदोलनकारी उम्र सीमा में राहत की मांग भी उठा रहे हैं। Reform Manch ने JPSC में 2018 के Age Cutoff को आधार बनाने और JSSC में अधिकतम उम्र सीमा 42 वर्ष करने की मांग रखी है।

उत्पाद सिपाही भर्ती में अभ्यर्थियों की मौत का मुद्दा भी उठा
आंदोलन में JSSC उत्पाद सिपाही भर्ती की शारीरिक परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की मौत का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है।
छात्रों का आरोप है कि तेज गर्मी और कथित अव्यवस्थाओं के कारण कई अभ्यर्थियों की जान गई। आंदोलनकारी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और मृत अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। Reform Manch ने मृत अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये सहायता देने की मांग भी रखी है।

आखिर देवेंद्र नाथ महतो अनशन पर क्यों बैठे?
लगातार धरना-प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत के बावजूद ठोस निर्णय नहीं होने के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की।
उनका कहना है कि सरकार को छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए। उनका अनशन आंदोलन को और अधिक निर्णायक बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि बीच में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद देवेंद्र ने पानी ग्रहण किया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है और उनकी भूख हड़ताल जारी है।

अनशन के दौरान बिगड़ी देवेंद्र की तबीयत
8 अगस्त को देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार डॉक्टरों ने ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कम बताया है। शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति है और बोलने में भी परेशानी हो रही है।
उनकी बिगड़ती तबीयत ने आंदोलन को और गंभीर बना दिया है। छात्रों ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

सोनम वांगचुक ने दिया छात्रों को समर्थन

आंदोलन को उस समय राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया।
वांगचुक ने देवेंद्र नाथ महतो से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की और छात्रों की मांगों को लेकर समर्थन जताया। उनके हस्तक्षेप के बाद देवेंद्र ने पानी ग्रहण किया था, हालांकि उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखा।

अभिनेता पीयूष मिश्रा भी आंदोलन में पहुंचे
आंदोलन को समर्थन देने के लिए अभिनेता और रंगकर्मी पीयूष मिश्रा भी रांची पहुंचे।
उन्होंने धरना स्थल पर छात्रों से मुलाकात की और उनके संघर्ष के प्रति समर्थन जताया। पीयूष मिश्रा ने वहां अपना चर्चित गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ भी गाया, जिससे आंदोलन स्थल पर छात्रों का उत्साह बढ़ा। उन्होंने कहा कि छात्रों की आंखों में दिख रहे दर्द और पीड़ा को देखकर वे उनसे मिलने पहुंचे।

राजनीतिक दलों का भी बढ़ रहा समर्थन

आंदोलन अब सिर्फ छात्र संगठनों तक सीमित नहीं रह गया है। विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समूह भी छात्रों के समर्थन में सामने आ रहे हैं।
8 अगस्त को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचा और आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात की। भाजपा ने सरकार पर छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया।

इसके अलावा विभिन्न छात्र संगठन और राजनीतिक समूह भी आंदोलन के समर्थन में गतिविधियां कर रहे हैं।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत क्यों नहीं बन रही बात?
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं। छात्रों ने अपनी मांगों की सूची सरकार के सामने रखी है।
सरकार की ओर से छात्रों की कुछ मांगों को जायज बताते हुए उन पर विचार करने का भरोसा दिया गया है। लेकिन छात्रों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उन्हें लिखित और ठोस कार्रवाई चाहिए, केवल आश्वासन नहीं।
यही वजह है कि बातचीत के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ है।

10 अगस्त को विधानसभा घेराव की तैयारी

अब आंदोलन का अगला बड़ा पड़ाव 10 अगस्त है।
छात्र संगठनों ने विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। उनका कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

इससे पहले आंदोलनकारी तिरंगा मार्च समेत कई कार्यक्रमों की तैयारी भी कर चुके हैं। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों में छात्रों की मौजूदगी बनी हुई है।

आंदोलन की तस्वीर अब बड़ी होती जा रही है

करीब दो सप्ताह से चल रहे इस आंदोलन ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और सरकारी नौकरी की प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी उनके लिए सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि वर्षों की मेहनत और भविष्य का सवाल है। परीक्षा में गड़बड़ी या भर्ती प्रक्रिया में देरी होने से उनकी उम्र, पैसा और तैयारी—तीनों प्रभावित होते हैं।
दूसरी ओर सरकार जांच और बातचीत के जरिए मामले का समाधान निकालने की बात कह रही है।
लेकिन फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 10 अगस्त के विधानसभा घेराव से पहले सरकार और छात्रों के बीच सहमति बन पाएगी?
और उससे भी गंभीर सवाल—अनशन पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ती तबीयत के बीच क्या सरकार कोई निर्णायक कदम उठाएगी?
झारखंड का यह छात्र आंदोलन अब केवल एक परीक्षा को लेकर विवाद नहीं रह गया है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और युवाओं के भविष्य का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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