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कूटकू मैदान में गूंजा आदिवासी संस्कृति का रंग, धूमधाम से मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस

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-पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य और गीत-संगीत ने बांधा समां, सामाजिक एकता का दिया संदेश

युसूफ खान/सामरी/कुसमी। सामरी क्षेत्र के कूटकू मैदान में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आदिवासी संस्कृति, परंपरा और गौरव को समर्पित इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न समाजों के प्रमुखों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे लोगों और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से पूरा कूटकू मैदान आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर पंचायत कुसमी अध्यक्ष राजेंद्र भगत रहे। कार्यक्रम में सरपंच संघ अध्यक्ष संतोष इंजीनियर, सामरी क्षेत्र के बीडीसी संतोष सिंह, मुन्नेलाल नाग, सामरी सरपंच रमेश नगेसिया, खसरू राम बुनकर सर्वआदिवासी समाज ब्लॉक अध्यक्ष सुनील नाग दीपक बुनकर संगीता नाग सहित विभिन्न समाजों के प्रमुख एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

संस्कृति और परंपरा की दिखी शानदार झलक

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा में महिला, पुरुष एवं युवाओं की सहभागिता ने कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ा दिया। मैदान में पूरे समय उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा।

अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने का आह्वान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की गौरवशाली संस्कृति, परंपरा, अधिकारों और पहचान को सम्मान देने का अवसर है। आदिवासी समाज ने सदियों से अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखा है। आज जरूरत है कि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ते हुए शिक्षा और विकास के क्षेत्र में आगे बढ़े तथा समाज की गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाए।

अतिथियों ने सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी समाजों की सहभागिता और आपसी सहयोग से ही क्षेत्र का समग्र विकास संभव है।

एकता और भाईचारे का दिया संदेश

कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के प्रमुखों की उपस्थिति ने सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया। लोगों ने एक-दूसरे को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दीं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक आयोजनों के बीच कूटकू मैदान में देर तक उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

कूटकू मैदान में आयोजित यह आयोजन न केवल आदिवासी संस्कृति और परंपरा का उत्सव बना, बल्कि सामरी क्षेत्र की सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत की भी मजबूत तस्वीर पेश कर गया।

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