-राजिम साहित्य संगोष्ठी में कवियों ने गोस्वामी तुलसीदास जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया)
राजिम- नवापारा:-त्रिवेणी संगम साहित्य समिति राजिम नवापारा जिला गरियाबंद(छ. ग. ) पं. क्र.25298 के द्वारा संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन, पथर्रा नवाडीह (राजिम)स्थित त्रिवेणी संगम साहित्य सदन में किया गया|कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार मकसुदन राम साहू “बरीवाला” ने किया| किया, इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों ने संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी की साहित्यिक रचनाओं के बारे में चर्चा करते हुए श्री राम चरित मानस को सर्वकालिक ग्रंथ की संज्ञा दी,साहित्यकार साथियों में सर्वप्रथम कवि श्रवण कुमार साहू, “प्रखर”ने अपनी धारदार रचना के माध्यम से संदेश देते हुए कहा —
श्रीराम को पुरुषोत्तम बनाया,
मर्यादा में जीना सिखाया|
समरसता का पाठ पढ़ाया,
राम राज्य का भाव जगाया||
हे! तुलसी तेरे मानस ने—–
मानस की महत्ता पर चर्चा करते हुए रोहित साहू माधुर्य ने जो कहा उनके कविता की बानगी देखिये–
नि होतिस कहूं जग म तुलसी,
इंकर महिमा ल गातिस कोन।
धरम के नाम ह जुच्छा परतिस,
अउ नवा मारग धरातिस कोन।।
काव्य पाठ के अगले कड़ी में मीडिया प्रभारी एवम कवि छग्गु यास “अडिल”ने सावन में श्रृंगार रस पर लाजवाब रचना पढ़ते हुए कहा —
तोर रुमुक झूमुक पैरी के धुन ह रे बइरी,
मन ल वो मोर मोहि डारे |
का जादू चला के वो गोरी
अंतस म जगा ल बनाए ,,प्रस्तुत कर खूब वाह वाही लूटी,
इसी कड़ी मे सहसचिव नरेंद्र पार्थ ने कहा कि,
श्रद्धा भक्ति ले भजके तुलसी पा गे राम भगवान |
संत कवि मार्गदर्शक बन,आज जग म होगे महान ||
की उत्कृष्ट प्रस्तुति रही आगे की कड़ी मे समिति के कोषाध्यक्ष भारत लाल साहू ” प्रभु ” ने माता की सुंदर वन्दना प्रस्तुत करके अध्यात्म पूर्ण वातावरण तैयार किया उनके काव्य की धार देखिये-
मोर भारत देश के माटी,
सबले हावय खास|
इंहा जनम लेथे संगी,
कवि सूर,तुलसीदास ||
काव्य गोष्ठी में सद्भाव और प्रेम पर बेहतरीन संदेश देते हुए समिति सलाहकार डॉ रमेश सोनसायटी साहू ने अपने चिर परिचित अंदाज में काव्य पाठ करते हुए कहा कि-
संकट सारे मिट गए लेकर अंजनी नंदन हनुमान का नाम
कारज पूरे हो गए लेकर कौशल्या नंदन श्री राम का नाम
रचना पढ़ कर खूब वाह वाही लूटी|
इसके पश्चात अध्यक्ष मकसुदन साहू,”बरीवाला” ने गांव का सजीव चित्रण करते हुए कहा कि,
महर-महर महकत हे मोर गाँव के खोर|
जगा-जगा बगरे, डीही डोंगर के शोर||
कार्यक्रम में कवि रामेश्वर रंगीला ने शानदार रचना पढ़ते हुए कहा कि-
कवि तो बहुत होते हैं पर,हर कोई खास नहीं होता, रामायण सब पढ़ते हैं,हर कोई तुलसीदास नहीं होता||
आभार प्रदर्शन नरेंद्र साहू, “पार्थ” ने किया, इस अवसर पर अनेक श्रोताओं ने काव्य पाठ का आनंद लिया|







