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रायपुर के गोंडवाना भवन में सर्व आदिवासी समाज की उच्चस्तरीय बैठक, संस्कृति और एकता पर हुआ मंथन

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रायपुर, 26 अगस्त 2026। बुधवार को रायपुर स्थित गोंडवाना भवन में सर्व आदिवासी समाज की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न आदिवासी समाजों के पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने समाजहित, संगठन, शिक्षा, एकता और आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास को लेकर विस्तार से चर्चा की और महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

बैठक का प्रमुख विषय आदिवासी समाज की रूढ़िजन्य प्रथाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण रहा। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी समाज की परंपराएं उसकी पहचान और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन परंपराओं के सकारात्मक एवं सामाजिक मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बैठक में युवाओं की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। युवाओं से अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं को समझने के साथ ही समाज की एकता और विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया गया। साथ ही बदलते समय के अनुरूप समाजहित में आवश्यक सकारात्मक बदलावों को अपनाने की आवश्यकता पर भी विचार व्यक्त किए गए।

इस अवसर पर बी.एस. रावटे, प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष; अकबर राम कोर्राम; यू.आर. गंगरले; बी.एस. नागेश, जिलाध्यक्ष रायगढ़; महेश कुमार रावटे, कार्यकारिणी जिला अध्यक्ष एवं संयुक्त सचिव; लतेलराम नाईक, 18 गढ़ महासभा अध्यक्ष; शिवकुमार पात्र, जिलाध्यक्ष सर्व आदिवासी हल्बा समाज कोंडागांव; बीरेंद्र कुदराम, सर्व आदिवासी हल्बा समाज सदस्य; बीरबल आयम, सर्व आदिवासी युवा प्रभाग जिला अध्यक्ष बलरामपुर; विनोद भगत (रागी दिवान); रूपेंद्र नागरची, सर्व आदिवासी उपाध्यक्ष धमतरी; अमर सिंह कुशरे, सर्व आदिवासी समाज अध्यक्ष कबीरधाम; रामेश्वर राम टोप्पो, सर्व आदिवासी उरांव समाज अध्यक्ष; खिलेश गागड़ा, सर्व आदिवासी सदस्य कोंडागांव सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे।

बैठक के समापन अवसर पर पदाधिकारियों ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी हुई है। समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर समाज में जागरूकता, तथ्यात्मक जानकारी और शांतिपूर्ण संवाद जरूरी है।

पदाधिकारियों ने समाजजनों से अपील की कि समाज की एकता को मजबूत बनाए रखते हुए अपनी संवैधानिक एवं सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से विचार-विमर्श करें और समाज के सर्वांगीण विकास की दिशा में एकजुट होकर कार्य करें।

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