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आजीविका डबरी बनी मनमोहन की खुशहाली का आधार, सिंचाई के साथ मछली पालन और सब्जी उत्पादन की राह हुई आसान

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जांजगीर-चांपा 03 सितम्बर 2026। रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन के लिए उपयोगी परिसंपत्तियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बम्हनीडीह विकासखण्ड के ग्राम बघौदा निवासी श्री मनमोहन हंशराज के खेत में निर्मित व्यक्तियों के लिए कृषि तालाब निर्माण (आजीविका डबरी) इसका एक प्रेरक उदाहरण है। आजीविका डबरी निर्माण से जहां उनके खेतों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, वहीं मछली पालन एवं आगामी दिनों में सब्जी उत्पादन के माध्यम से उनकी आजीविका के नए अवसर भी तैयार हुए हैं। श्री मनमोहन के खेत में लगभग 0.30 एकड़ भूमि में व्यक्तिगत आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया। वर्ष 2024-25 में 2.76 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से कराए गए इस कार्य में 2.53 लाख रुपये मजदूरी तथा 0.23 लाख रुपये सामग्री पर व्यय किए गए। इस कार्य से लगभग 1003 मानव दिवस का रोजगार सृजन हुआ। डबरी निर्माण से जल संरक्षण एवं जल संचयन क्षमता में वृद्धि के साथ खेतों की सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

आजीविका डबरी निर्माण से पहले श्री मनमोहन के खेतों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था, जिसके कारण फसल उत्पादन प्रभावित होता था। वर्षा पर निर्भरता अधिक होने से खेती में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आजीविका डबरी बनने के बाद खेतों को सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे खेती को स्थायित्व मिला है और फसल उत्पादन की संभावनाएं भी बेहतर हुई हैं। श्री मनमोहन ने डबरी के आसपास अरहर एवं हल्दी की खेती भी शुरू की है। वर्तमान में डबरी में मछली पालन किया जा रहा है। साथ ही आगामी गर्मी के मौसम में डबरी के पानी का उपयोग कर सब्जी उत्पादन करने की तैयारी भी की जा रही है। इस तरह एक ही परिसंपत्ति का उपयोग सिंचाई, मछली पालन और अन्य कृषि गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जिससे परिवार की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होने की संभावना बढ़ी है। वे बताते है कि विकसित भारत जी राम जी योजना के आने के बाद अब उन्हें 300 रूपए की मजदूरी और 125 दिवस का रोजगार गांव में ही प्राप्त होगा। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

श्री मनमोहन बताते हैं कि आजीविका डबरी बनने से उनकी खेती के लिए पानी की समस्या काफी हद तक दूर हुई है। अब खेतों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध है। डबरी में मछली पालन शुरू करने के साथ उन्होंने आसपास अरहर और हल्दी लगाई है। आने वाले गर्मी के दिनों में सब्जी उत्पादन की भी तैयारी है। उनका कहना है कि इस परिसंपत्ति ने खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आजीविका के अवसर भी उपलब्ध कराए हैं। यह आजीविका डबरी जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन के उद्देश्य को एक साथ पूरा कर रही है। यह उदाहरण दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित उपयोगी परिसंपत्तियां हितग्राहियों के लिए लंबे समय तक आय और आत्मनिर्भरता का आधार बन सकती हैं।

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