भारत में आयोजित हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन जिसकी मेजवानी भारत कर रहा है, में 21 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और उनके प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. इतने बड़े शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर होना तो स्वाभाविक है. इस समिट को अमेरिका समेत दुनिया भर के देशों में चर्चा मिल रही है. इस बीच अमेरिका के नामी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी ब्रिक्स समिट पर दो रिपोर्ट छापी हैं.
ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं. इसके अलावा भी कई देशों के प्रतिनिधि भी दिल्ली के इस शिखर सम्मेलन में शामिल हो रहे है.
अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स को इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर सबसे ज्यादा मिर्ची लगी है. उसने इस जमावड़े को लेकर नकारात्मक टिप्पणी ही की है. लेकिन यह टिप्पणी भी होना उसके लिए इसलिए स्वाभाविक है क्योंकि अमेरिका इसे अपने प्रभुत्व के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर देख रहा है.
न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि इस समिट में दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले देश जुड़ रहे हैं, लेकिन उनके बीच मतभेद भी गहरे हैं. उसने आगे लिखा है कि चीन, रूस, ब्राजील और भारत चाहते हैं कि पश्चिमी संस्थानों पर निर्भरता कम हो जाए. सबसे ज्यादा मिर्ची इस बात से लगी कि इस सम्मेलन में ईरान भी शामिल है जिसने अमेरिका को युद्ध में ‘नाकों चने चबवा दिए’.
वहीं, पाकिस्तानी मीडिया DAWN का मानना है कि भारत इस सम्मेलन के जरिए ब्रिक्स की वैश्विक भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. DAWN ने अपनी खबर में पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात पर जोर दिया है.
यूरोपीय मीडिया भी यह दिखने की कोशिश कर रहा है कि यह संगठन कोई एकीकृत सैन्य समूह नहीं बल्कि अलग-अलग हितों वाले देशों का एक ढीला-ढाला आर्थिक मंच है. हालांकि, डॉन और द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार अपनी कवरेज में इस बात पर बारीक नजर रखे हुए है कि ब्रिक्स का विस्तार किस दिशा में जा रहा है.







