मोदी सरकार द्वारा ₹2000 ज्यादा के यूपीआई पेमेंट चार्ज के ऐलान के बाद देश में बवाल मचा हुआ है। विपक्ष मोदी सराकर पर अमेरिका और ट्रंप के सामने झुकने का आरोप लगाया है। खुद लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) UPI payment charge को लेकर सीधे पीएम मोदी पर निशाना साध रहे हैं। UPI Payment Charges पर विपक्ष के आरोपों पर अब मोदी सरकार ने जवाब दिया है। केंद्र की मोदी सरकार ने UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने के फैसले को लेकर विदेशी दबाव के आरोपों को खारिज किया है.
वित्त मंत्रालय ने साफ कहा है कि न ट्रंप के आगे झुके हैं और न ही कोई विदेशी दबाव है। ये फैसला किसी भी विदेशी दबाव में नहीं लिया गया है। UPI से जुड़े नीतिगत फैसले भारत अपने स्तर पर लेता है और इनका किसी विदेशी दबाव से कोई लेना-देना नहीं है। इनका मकसद डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आत्मनिर्भर, समावेशी और किफायती बनाना है।
वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहेगा। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने, दुकानों पर भुगतान करने और QR कोड स्कैन कर भुगतान करने पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। मंत्रालय के मुताबिक, पर्सन टू पर्सन ट्रांसफर हमेशा मुफ्त रहेंगे, चाहे लेनदेन की रकम कितनी भी हो।
मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- 2016 में लॉन्च होने के बाद से, UPI दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम इंटरऑपरेबल पेमेंट सिस्टम बन गया है। पूरी तरह से भारत की अपनी शर्तों पर। अकेले अगस्त 2026 में UPI ने 24.5 बिलियन ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस किए। इस सिस्टम को सेल्फ-सस्टेनेबल, सिक्योर और इनोवेटिव बनाए रखने के लिए, हाई-वैल्यू मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर एक छोटी सी फीस इन चीज़ों को फंड करने में मदद करती है। नया फ्रेमवर्क यह पक्का करता है कि ज़्यादा वैल्यू वाले मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन से मिले रिसोर्स को छोटे बिज़नेस को सपोर्ट करने और पूरे देश में डिजिटल पेमेंट को मज़बूत करने के लिए फिर से इन्वेस्ट किया जाए।
UPI Payment Charges की खास बातें:
- P2P यानी पर्सन टू पर्सन पर कोई चार्ज नहीं: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच ट्रांसफर हमेशा फ्री होता है, चाहे कितना भी अमाउंट हो।
- छोटे व्यापारी सुरक्षित: UPI QR कोड के ज़रिए हर महीने ₹1 लाख तक कमाने वाले वेंडर पर कोई चार्ज नहीं लगता।
- रोज़ाना के पेमेंट सुरक्षित: 95% से ज़्यादा मर्चेंट पेमेंट ₹2,000 से कम के होते हैं — ये फ्री रहते हैं।
- ₹2,000 से ज़्यादा पर मामूली MDR: सिर्फ़ ₹2,000 से ज़्यादा के बड़े मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर ही मर्चेंट को एक छोटी सी फीस (0.4%) देनी होती है, जो क्रेडिट कार्ड चार्ज या दूसरे नेटवर्क चार्ज से बहुत कम है।
- ज़रूरी सर्विस पर लिमिट: रेलवे, फ्यूल, टेलीकॉम, बिल पेमेंट, इंश्योरेंस, वगैरह पर ₹2,000 से ज़्यादा के हर ट्रांज़ैक्शन पर ₹5 की फ्लैट फीस है।
- खास कम रेट: म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज़ पेमेंट पर सिर्फ़ 0.02% टैक्स लगता है, जिसकी लिमिट ₹300 है।