बीजापुर संवाददाता – पुकार बाफना
सड़क दुर्घटनाएं आज हमारे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। आए दिन तेज रफ्तार, लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण सड़कें खून से लाल हो रही हैं। दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा रही है, परिवार उजड़ रहे हैं और कई लोग जीवनभर के लिए अपंग हो जाते हैं। सवाल यह है कि आखिर इन हादसों पर रोक कब लगेगी?
सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण वाहन चालकों की लापरवाही है। तेज गति से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग करना, मोबाइल का उपयोग और हेलमेट व सीट बेल्ट की अनदेखी आम बात हो गई है। वहीं, खराब सड़कें, अव्यवस्थित यातायात, पर्याप्त संकेतक और स्ट्रीट लाइट का अभाव भी दुर्घटनाओं को बढ़ावा देता है।
प्रशासन और यातायात विभाग की जिम्मेदारी केवल चालान काटने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर सड़क सुधार, स्पीड ब्रेकर, संकेतक और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इसके साथ ही नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। कुछ मिनट बचाने की जल्दबाजी किसी की पूरी जिंदगी छीन सकती है। नियमों का पालन करना केवल कानून का डर नहीं, बल्कि जीवन के प्रति सम्मान है।
सड़क सुरक्षा के लिए सरकार, प्रशासन और जनता को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे। जब तक हर व्यक्ति सड़क पर अपनी और दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देगा, तब तक दुर्घटनाओं का सिलसिला थमना मुश्किल है। *सड़कें विकास का माध्यम हैं, मौत का रास्ता नहीं।*







