भारत-कनाडा आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी, CEPA समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर जोर; 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
नई दिल्ली/ओटावा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 और 12 दिसंबर 2026 को कनाडा के दौरे पर जाएंगे। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और व्यापारिक सहयोग को नई गति देना है। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को जल्द अंतिम रूप देने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे समय में यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ी है और कनाडा अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करने के लिए नए बाजारों की तलाश कर रहा है।
भारत में कनाडा के व्यापार मंत्री और विदेश मंत्री की गतिविधियों के बीच इस समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिशें तेज हुई हैं। दोनों देशों की सरकारें व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं।
CEPA समझौते पर क्यों टिकी हैं दोनों देशों की नजरें?
भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को विस्तार देने का एक अहम प्रयास है। इसका उद्देश्य केवल आयात-निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि व्यापार के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना भी है।
इस तरह के समझौते के तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, बाजार तक पहुंच, निवेश तथा अन्य आर्थिक विषयों पर सहमति बनाने की कोशिश की जाती है। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तें दोनों पक्षों की बातचीत और सहमति पर निर्भर करेंगी।
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में CEPA को आर्थिक साझेदारी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ट्रंप की टैरिफ नीति से कनाडा पर बढ़ा दबाव
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव ने कनाडा की आर्थिक रणनीति को प्रभावित किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी व्यापार नीतियों और आयात शुल्क से जुड़े फैसलों के बीच कनाडा अपने निर्यात के लिए वैकल्पिक बाजारों का विस्तार करना चाहता है।
कनाडा की रणनीति है कि उसका व्यापार केवल अमेरिकी बाजार पर निर्भर न रहे। इसके लिए वह भारत, यूरोपीय संघ, चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने भी भारत के साथ व्यापार समझौते को वर्ष 2026 के अंत तक पूरा करने की दिशा में प्रयासों की बात कही है। ऐसे में भारत के साथ समझौता कनाडा की व्यापक व्यापार विविधीकरण नीति का हिस्सा है।
भारत को क्या हो सकता है फायदा?
भारत के लिए कनाडा के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध नए कारोबारी अवसर पैदा कर सकते हैं। समझौते की शर्तों पर सहमति बनने से भारतीय कंपनियों को कनाडाई बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
इसके अलावा, सेवा क्षेत्र, तकनीकी सहयोग, निवेश और ऊर्जा के क्षेत्र में भी संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम समझौते में किन वस्तुओं, सेवाओं और कारोबारी गतिविधियों को शामिल किया जाता है तथा बाजार तक पहुंच की शर्तें क्या तय होती हैं।
भारतीय उद्योगों के लिए कनाडा के बाजार में बेहतर अवसर मिलने का अर्थ निर्यात बढ़ाने और नए व्यापारिक साझेदार तैयार करने की संभावना भी है।
ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा पर भी होगी चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच व्यापार के अलावा ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी सहयोग आगे बढ़ाने की सहमति बनी है।
दोनों देशों के बीच वित्त, रक्षा एवं सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी संपर्क बढ़ा है। ऐसे में प्रस्तावित यात्रा को केवल व्यापार समझौते तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
पुराने तनाव के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश
भारत और कनाडा के संबंधों में पिछले वर्षों के दौरान कूटनीतिक तनाव देखने को मिला था। अब दोनों सरकारें संवाद और आर्थिक सहयोग के जरिए रिश्तों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।
व्यापार वार्ता को गति देना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आर्थिक साझेदारी मजबूत होने से दोनों देशों के कारोबारी समुदायों को लाभ मिलने की संभावना है, लेकिन इसके लिए बातचीत के लंबित मुद्दों पर सहमति बनाना जरूरी होगा।
दिसंबर का दौरा क्यों है अहम?
प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित कनाडा यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं बदलते व्यापारिक समीकरणों के बीच नए साझेदार तलाश रही हैं। अमेरिका की टैरिफ नीतियों ने इस जरूरत को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दोनों देश दिसंबर के दौरे के दौरान CEPA वार्ता को निर्णायक मुकाम तक पहुंचा पाते हैं। यदि समझौते पर सहमति बनती है, तो यह भारत-कनाडा आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने और 2030 तक व्यापार बढ़ाने के लक्ष्य की ओर महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।







