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राजस्व पटवारी संघ की जारी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल के बीच,स्वामित्व योजना के तहत दावा-आपत्ति की जांच करने पहुंचे पटवारी, सवालों के घेरे में

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रिपोर्ट-खिलेश साहू
कुरूद:- छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ की 13 अक्टूबर से जारी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल के बीच ग्राम बानगर में स्वामित्व योजना के तहत दावा-आपत्ति की जांच करने पहुंचे पटवारी का मामला सवालों के घेरे में आ गया है। एक ओर पटवारियों द्वारा मैदानी कार्यों और ऑनलाइन कामकाज के बहिष्कार का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हल्का नंबर 52 के पटवारी लाल जी ध्रुव के जांच के लिए गांव पहुंचने से हड़ताल के दौरान कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच आवेदक राकेश यादव ने स्वामित्व योजना की प्रकाशित सूची में भूमि की प्रविष्टि को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटवारी लाल जी ध्रुव स्वामित्व योजना से संबंधित दावा-आपत्ति की जांच के लिए ग्राम बानगर पहुंचे थे। बताया गया कि वे संबंधित अभिलेख लेकर ग्राम पंचायत पहुंचे, जहां सरपंच, उपसरपंच और ग्रामीणों की मौजूदगी में जांच प्रक्रिया की गई। हालांकि, हड़ताल के दौरान यह जांच किस आदेश या निर्देश के तहत की गई, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है संबंधित विभाग और पटवारी का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। हमारे द्वारा पटवारी से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन मोबाईल बंद बताया ….जांच की निष्पक्षता पर आवेदक ने उठाए सवाल
आवेदक राकेश यादव का आरोप है कि उन्होंने स्वामित्व योजना के तहत प्रकाशित सूची में दर्ज प्रविष्टि के विरुद्ध दावा-आपत्ति प्रस्तुत की थी। इसके बावजूद जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर उन्हें आशंका है। उनका कहना है कि मामले में सभी संबंधित दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष परीक्षण किया जाना चाहिए। हालांकि, जांच एकतरफा किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पटवारी का पक्ष सामने आना बाकी है।….खसरा प्रविष्टि को लेकर शिकायत, मृत व्यक्ति के नाम दर्ज होने का दावा…..राकेश यादव के अनुसार, ग्राम बानगर, पटवारी हल्का नंबर 52 में स्थित भूमि के संबंध में उन्होंने 12 सितंबर 2026 को तहसील कार्यालय में शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में राजस्व अभिलेखों और स्वामित्व योजना की प्रकाशित सूची में दर्ज जानकारी के बीच कथित विसंगति की जांच कराने की मांग की गई है।….आवेदक राकेश यादव मुताबिक, ग्राम बानगर की खसरा क्रमांक 196, रकबा 0.03 हेक्टेयर की भूमि राजस्व अभिलेखों में घुरवा बाई, पति स्वर्गीय लीलाराम यादव के नाम दर्ज बताई गई है। आवेदन में उल्लेख है कि घुरवा बाई ने यह भूमि 2 जून 2012 को पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से खरीदी थी। आवेदक का दावा है कि संबंधित भूमि पर लंबे समय से उनका अधिकार एवं कब्जा रहा है तथा वहां उनका निवास भी रहा है।
….शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्वामित्व योजना की प्रकाशित दावा-आपत्ति सूची में संबंधित भूमि को खसरा क्रमांक 357/60 के रूप में दर्शाते हुए नरेंद्र कुमार, पिता चुरामन के नाम दर्ज किया गया है। आवेदक का यह भी दावा है कि नरेंद्र कुमार का निधन हो चुका है और वे वर्तमान में ग्राम बानगर में निवासरत नहीं हैं। ऐसे में भूमि की प्रविष्टि किस आधार पर की गई, इसका परीक्षण कराए जाने की मांग की गई है। हालांकि, खसरा क्रमांक 196 और 357/60 के बीच संबंध, भूमि की वास्तविक पहचान तथा स्वामित्व संबंधी दावों की पुष्टि राजस्व अभिलेखों, पंजीकृत विक्रय पत्र और स्थल निरीक्षण से ही हो सकेगी। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।….हड़ताल के बीच जांच किसके निर्देश पर हुई…..?पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच मैदानी जांच किए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या पटवारी लाल जी ध्रुव को सक्षम अधिकारी की ओर से जांच के निर्देश दिए गए थे? यदि आदेश जारी हुआ था, तो उसकी प्रति और उसमें निर्धारित कार्य की प्रकृति क्या है? क्या यह जांच हड़ताल के दौरान किए जा रहे कार्यों के संबंध में संघ की घोषित रणनीति के अनुरूप थी? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और पटवारी संघ के आधिकारिक पक्ष से ही मिल सकेगा।
रिकॉर्ड की जांच और कार्रवाई की मांग…..आवेदक ने संबंधित खसरा क्रमांक के राजस्व अभिलेखों, पूर्व स्वामित्व, कब्जे और मौके की स्थिति का परीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही, दावा-आपत्ति का निराकरण होने तक संबंधित भूमि के स्वामित्व के संबंध में अंतिम कार्रवाई नहीं करने तथा जांच में त्रुटि पाए जाने पर अभिलेखों में नियमानुसार सुधार करने का अनुरोध किया है।मामले में अब राजस्व विभाग की कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं। प्रशासन के सामने चुनौती है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए और अभिलेखों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही, हड़ताल के दौरान मैदानी जांच किए जाने के संबंध में भी आधिकारिक स्थिति सामने आनी चाहिए।फिलहाल पूरे मामले में न तो भूमि की प्रविष्टि संबंधी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि हुई है और न ही जांच के लिए जारी किसी विभागीय आदेश की जानकारी सामने आई है। ऐसे में राजस्व अभिलेखों, शिकायत के दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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