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राजेन्द्र जायसवाल/जांजगीर चांपा –

चांपा के समीप बसे सिवनी गांव के सावपारा में राठौर परिवार में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में पं दीपक कृष्ण महाराज ने कथा का वर्णन किया, परीक्षित मोक्ष व ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। भागवत कथा के दूसरे दिन भक्तराज ध्रुव की कथा के माध्यम से श्रोताओं को भक्ति और दृढ़ संकल्प को विस्तार से समझाया। ध्रुव चरित्र की कहानी सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए और संकल्प और विश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने की सीख ली।

कथावाचक दीपक महराज ने बताया कि सतयुग के दौरान अवधपुरी में राजा उत्तानपद राज किया करते थे। उनकी बड़ी रानी का नाम सुनीति था और उनके कोई संतान नहीं थी। देवर्षि नारद रानी को बताते हैं कि यदि तुम दूसरी शादी करवाओगी तो संतान प्राप्त होगी। रानी अपनी छोटी बहन सुरुचि की शादी राजा से करवा देती है। कुछ समय बाद सुरुचि को एक संतान की उत्पत्ति होती है। जिसका नाम उत्तम रखा। उसके कुछ दिनों के बाद बड़ी रानी भी एक बालक ध्रुव को जन्म देती है। 5 वर्ष बाद जब राजा उत्तम का जन्म दिन मना रहे थे तो बालक ध्रुव भी बच्चों के साथ खेलता हुआ उनकी गोद में बैठ गया, जिस पर सुरुचि उठा देती है और उसे कहती है कि यदि अपने पिता की गोद में बैठना है तो अगले जन्म तक इंतजार कर।

बालक ध्रुव यह बात चुभ जाती है और वह वन में जाकर कठिन तपस्या करने लगते हैं। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उन्हें दर्शन देते हैं और उन्हें मनचाहा वरदान देने का वचन देते हैं। इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि किसी से भेदभाव नहीं करना चाहिए और प्रभु की भक्ति में कोई विघ्न नहीं डालना चाहिए। कथा के बीच-बीच में और भजन भी सुनाए गए भजनों पर श्रद्धालु झूम उठें।

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