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अयोध्या मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद राम भक्तों के जन सैलाब को देखते हुए रामलला के दर्शन के लिए सुबह 7:00 बजे से रात्रि के 10:00 बजे तक अविराम द्वार खोल दिए जाते हैं राम जन्म भूमि परिसर में भगवान रामलला 5 वर्षीय बालक के रूप में विराजमान हैं। उनको भी अब 15 घंटे विश्राम नहीं मिल रहा है।

बता दें कि प्राण प्रतिष्ठा से पहले जब प्रभु श्रीराम अस्थाई मंदिर में थे तो दोपहर 12:00 बजे से लेकर 2:00 बजे तक प्रभु राम विश्राम करते थे, लेकिन जब से भव्य महल में विराजमान हुए हैं, तब से प्रभु राम का पट 15-15 मिनट के लिए बंद होता रहता है। प्रभु राम के विश्राम को लेकर अब नई रूपरेखा राम मंदिर ट्रस्ट के द्वारा तैयार किया जा रहा है, वहीं राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास की मानें तो भक्त और भगवान का संबंध बहुत महत्वपूर्ण होता है। उन्हें रोका नहीं जा सकता, लेकिन शास्त्रों के मुताबिक प्रभु राम को विश्राम की भी आवश्यकता है, राम जन्म भूमि के मुख्य पुजारी बताते हैं कि ट्रस्ट इस बात पर विचार कर रहा है, आने वाले दिनों में दर्शन अवधि में कुछ बदलाव भी किया जा सकता है।

श्रद्धालुओं के ठहरने की भी व्यवस्था की जाएगी

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ परिसर के ट्रस्ट कार्यालय प्रभारी ने बताया कि प्रभु राम जब से अपने भव्य महल में विराजमान हुए हैं, तब से राम भक्त 24 घंटे में 15 घंटे तक दर्शन पूजन कर रहे हैं। वहीँ 15-15 मिनट के लिए आरती के समय पट बंद रहता है, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट अब इस पर विचार कर रहा है कि प्रभु राम को आराम देने के लिए कुछ समय निकाला जाए। यानि कि पहले जैसे 12:00 से लेकर 2:00 तक प्रभु राम विश्राम करते थे, वैसी ही परियोजना अब बनाई जा रही है। इतना ही नहीं कार्यालय प्रभारी ने आगे बताया कि बालाजी मंदिर की शैली पर आने वाले दिनों में राम मंदिर में भी व्यवस्था की जाएगी, आगामी दिनों में यहां भी एक लाख यात्रियों को रोकने ठहरने की व्यवस्था भी होगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

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