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19 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा यूपी के संभल में कल्कि धाम मंदिर की आधारशिला रखी गई l इस मंदिर का निर्माण श्री कल्कि धाम निर्माण ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है, जिसके अध्यक्ष आचार्य प्रमोद कृष्णम हैं l 1 फरवरी को पीएम मोदी से मुलाकात कर उन्हें मंदिर के शिलान्यास के लिए आमंत्रित करने के बाद कांग्रेस ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में संलिप्तता का हवाला देते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम को 6 साल के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया था l 

कल्कि धाम अन्य विष्णु मंदिरों से अलग और विशेष है क्योंकि भगवान विष्णु के सभी पिछले अवतारों के मंदिर उनके जन्म के बाद बनाए गए थे,जबकि कल्कि धाम ऐसे अवतार को समर्पित है जो भविष्य में होने वाला है l यह भी कहा जा सकता है, कल्कि धाम इस मायने में अद्वितीय हैं कि भगवन कल्कि के जन्म से पहले ही उनके मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।

कल्कि धाम मंदिर की विशेषताएं  – 

मंदिर पांच एकड़ क्षेत्र में फैला होगा और पांच साल के निर्माण चरण के लिए निर्धारित है। इसे अयोध्या के राम मंदिर और सोमनाथ मंदिर की तरह विशिष्ट गुलाबी रंग के पत्थर से तैयार किया जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके निर्माण में स्टील या लोहे के फ्रेम का उपयोग शामिल नहीं होगा। मंदिर में दस गर्भगृह होंगे, जिनमें से प्रत्येक भगवान विष्णु के दस अवतारों का प्रतिनिधित्व करेंगे। मंदिर का शिखर 108 फीट की ऊंचाई तक जाएगा, जिसका आधार जमीनी स्तर से 11 फीट ऊंचा होगा। इसके अतिरिक्त, इसमें कुल 68 पवित्र तीर्थ स्थल शामिल होंगे। 

कौन है कल्कि अवतार ? कहाँ होगा जन्म ? 

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान कृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान के बाद कलियुग का आरंभ हुआ। कलियुग 432,000 वर्षों तक माना जाता है। वर्तमान में कलियुग के 5,126 वर्ष बीत चुके हैं। श्रीमद्भागवत के 12वें स्कंध के 24वें श्लोक के अनुसार, भगवान कल्कि का जन्म पृथ्वी पर तब होगा जब गुरु (बृहस्पति), सूर्य और चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में संरेखित होंगे। श्रीहरि के इस दसवें अवतार की अनुमानित जन्म तिथि सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि होगी। पुराणों और भविष्य मलिका ग्रन्थ के अनुसार संभल ग्राम में कल्कि अवतार का जन्म होगा l इसे उत्तर प्रदेश के संभल ग्राम होने की उम्मीद है। यही कारण है कि इस स्थान पर कल्कि धाम का निर्माण हुआ।

कैसा दिखेगा कल्कि अवतार?

‘अग्नि पुराण’ के सोलहवें अध्याय में कल्कि अवतार को धनुष-बाण लहराते घोड़े पर सवार योद्धा के रूप में दर्शाया गया है। इस पाठ के अनुसार, भगवान विष्णु का कल्कि अवतार देवदत्त नामक सफेद घोड़े पर सवार होकर आएँगे और कलियुग के पापियों का नाश करेंगे। 64 कलाओं से संपन्न, कल्कि भगवान शिव की तपस्या करेंगे और दिव्य शक्तियां प्राप्त करेंगे l इनके आगमन के साथ अधर्म का नाश होगा और पुनः धर्म की स्थापना होगी और सतयुग प्रारंभ होगा l 

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