सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना गया है। इस पावन समय में पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि मिट्टी से बने शिवलिंग का पूजन करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
पार्थिव शिवलिंग क्या है?
“पार्थिव” का अर्थ होता है “पृथ्वी से बना हुआ”। पार्थिव शिवलिंग मिट्टी से निर्मित होता है और इसे एक ही दिन की पूजा के लिए बनाया जाता है। पूजन के बाद इसका विसर्जन बहते जल में किया जाता है।
पार्थिव शिवलिंग बनाने की विधि:
किसी पवित्र स्थान की मिट्टी लें – जैसे तुलसी के पौधे के नीचे की मिट्टी या गंगा तट की मिट्टी।
उसमें कुछ बूंदें गंगाजल मिलाएं।
अपने हाथों से (अंगूठा और उंगलियों की सहायता से) छोटा शिवलिंग बनाएं।
इसे मिट्टी या तांबे की थाली में स्थापित करें।
पूजन की सरल विधि:
1. शिवलिंग को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) और फिर गंगाजल से स्नान कराएं।
2. बेलपत्र, धतूरा, भस्म, सफेद फूल, भांग, चंदन और अक्षत अर्पित करें।
3. “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जप करें।
4. दीपक जलाकर शिव आरती करें।
5. पूजन के बाद शिवलिंग को बहते जल में विसर्जित करें।
सावन में पार्थिव शिवलिंग पूजन के लाभ:
भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मानसिक शांति और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है।
रोग, बाधाएं, दरिद्रता और विवाह संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।
यह साधना सौ वर्षों की तपस्या के समान फलदायी मानी गई है।
विशेष निर्देश:
मिट्टी से बना शिवलिंग कभी स्थायी रूप से घर में न रखें। हर दिन नया शिवलिंग बनाएं और पूजन के बाद उसका विसर्जन करें।









