आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में तनाव, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के चलते यूरिक एसिड से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं। यूरिक एसिड शरीर में प्यूरीन नामक तत्व के टूटने से बनता है और जब यह अधिक मात्रा में बनता है और पूरी तरह से मूत्र के ज़रिए बाहर नहीं निकल पाता, तो खून में जमने लगता है। इससे जोड़ों में सूजन, दर्द और गठिया (गाउट) जैसी परेशानियां पैदा हो सकती हैं।
मानसून में क्यों बढ़ता है यूरिक एसिड?
बरसात के मौसम में शरीर की पाचन क्षमता कमजोर हो जाती है। इस कारण यूरिक एसिड का स्तर आसानी से बढ़ सकता है। इस दौरान कुछ ऐसी सब्ज़ियां हैं जिनमें प्यूरीन या अन्य उत्तेजक तत्व अधिक होते हैं और इन्हें खाने से यूरिक एसिड की समस्या और गंभीर हो सकती है।
बरसात के मौसम में इन 5 सब्ज़ियों से बनाएं दूरी:
1. भिंडी (ओकरा)
भिंडी में मौजूद चिपचिपा पदार्थ पाचन को धीमा कर सकता है। यूरिक एसिड के रोगियों में यह सूजन और दर्द को बढ़ा सकता है।
2. बैंगन (एगप्लांट)
बैंगन में ऑक्सलेट्स और नाइट्रेट्स होते हैं, जो यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा सकते हैं। गठिया से पीड़ित लोगों को इससे बचना चाहिए।
3. पालक
पालक प्यूरीन से भरपूर होती है, जिससे यूरिक एसिड बनने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। खासतौर पर बरसात में इसका सेवन टालना चाहिए।
4. मशरूम
मशरूम में प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है। यह यूरिक एसिड को बढ़ाकर जोड़ों में दर्द और सूजन ला सकता है।
5. टमाटर
टमाटर भले ही प्यूरीन से कम भरपूर हो, लेकिन इसकी अम्लीय प्रकृति कुछ लोगों में यूरिक एसिड को ट्रिगर कर सकती है।
यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के उपाय:
दिनभर में कम से कम 8–10 गिलास पानी पिएं, ताकि शरीर से विषैले तत्व आसानी से बाहर निकल सकें।
रेड मीट, बियर, और सीफूड जैसे हाई प्यूरीन फूड्स से दूरी बनाएं।
फाइबर युक्त फल और सब्ज़ियों का सेवन करें, जैसे – गाजर, खीरा और सेब।
नियमित रूप से हल्का-फुल्का व्यायाम करें, लेकिन अत्यधिक परिश्रम से बचें।









