जिला जांजगीर चांपा बम्हनीडीह (सेमरिया)।
22 जुलाई को राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस के अवसर पर विकासखंड बम्हनीडीह अंतर्गत संकुल सेमरिया की शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, सेमरिया में देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत रैली का आयोजन किया गया। रैली में विद्यालय के प्राथमिक व माध्यमिक छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण तथा बाल केबिनेट के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

रैली मध्यान्ह भोजन के उपरांत विद्यालय परिसर से प्रारंभ होकर ग्राम के प्रमुख मोहल्लों – स्कूलपारा, बजरंग चौक, महामाया चौक, ठाकुरदेव मोहल्ला, सड़कपारा – में भ्रमण करते हुए ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा’ जैसे देशभक्ति गीत गाते हुए पुनः शाला परिसर लौटी। बच्चों को मार्गदर्शन प्रदान करते हुए प्रभारी प्रधान पाठक उमेश कुमार दुबे ने बताया कि 22 जुलाई 1947 को भारतीय संविधान सभा द्वारा ‘तिरंगे’ को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अंगीकृत किया गया था, जिसे हम हर वर्ष राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस के रूप में मनाते हैं।
उन्होंने छात्रों को तिरंगे के तीन रंगों की जानकारी देते हुए बताया – “झंडे में सबसे ऊपर गहरा केसरिया रंग है जो बलिदान और साहस का प्रतीक है, बीच में सफेद रंग शांति और सत्य का प्रतीक है तथा नीचे हरा रंग समृद्धि और विकास को दर्शाता है। इसके केंद्र में अशोक चक्र है, जो न्याय, गति और प्रगति का प्रतीक है।”
प्रभारी शिक्षक टीकाराम गोपालन और पितांबर प्रसाद कश्यप ने तिरंगे के ऐतिहासिक विकास पर जानकारी देते हुए बताया कि सन 1908 में भीकाजी कामा ने जर्मनी में एक तिरंगा झंडा फहराया था, जिसमें हरा, केसरिया और लाल रंग शामिल थे। यह झंडा धार्मिक एकता का प्रतीक था और इस पर देवनागरी में ‘वंदे मातरम्’ लिखा था। प्रथम विश्व युद्ध के समय इसे बर्लिन कमेटी ध्वज कहा गया, जिसे भारतीय क्रांतिकारियों ने अपनाया था।
वर्ष 1916 में पिंगली वेंकैया ने एक ऐसे झंडे की कल्पना की जो समूचे भारत को एक सूत्र में बांधे। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से सलाह लेकर तिरंगे के मध्य अशोक चक्र को शामिल करने की बात मानी। यह चक्र भारतीय संस्कृति की एकता और सतत गतिशीलता का प्रतीक बन गया।
इस अवसर पर एकादशीयां मांझी, कैलाश खूंटे, कौशल यादव, अनुपमा जांगड़े, अशोक जांगड़े सहित विद्यालय परिवार के समस्त शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। रैली का उद्देश्य बच्चों में राष्ट्रप्रेम, ऐतिहासिक चेतना और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
इस प्रकार से सेमरिया शाला में राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस को गर्व, उल्लास और देशभक्ति के भाव के साथ मनाया गया, जिससे नन्हें मनों में देश के प्रति जिम्मेदारी और गर्व का भाव विकसित हो सका।









