जगदलपुर-
बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी हैं, लेकिन सुरक्षाबलों को निर्णायक सफलता अब भी दूर नजर आ रही है। नक्सली अब बदलते समय के साथ तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं और सोशल मीडिया को हथियार बना रहे हैं। घेराबंदी के बावजूद उनका फरार हो जाना अब आम होता जा रहा है, जिससे सवाल उठने लगे हैं कि ऑपरेशनों की जानकारी आखिर उनके पास पहुंच कैसे रही है?
सोशल मीडिया बना सुरक्षा में सेंध का जरिया
पुलिस विभाग की शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है—जवानों की सोशल मीडिया पर गतिविधियां ऑपरेशन की गोपनीयता को नुकसान पहुंचा रही हैं। डीआरजी और अन्य बलों के जवान ऑपरेशन के दौरान रील्स, ग्रुप फोटो और वीडियो शूट कर रहे हैं, जिससे नक्सली पहले ही उनकी रणनीति भांप लेते हैं।
तकनीकी तौर पर अब भी मजबूत हैं नक्सली
बसवराजू जैसे शीर्ष कमांडर की मौत के बावजूद नक्सली संगठन तकनीकी और खुफिया तौर पर पूरी तरह सक्रिय है। हालिया जारी प्रेस नोट्स इस बात का प्रमाण हैं कि वे सुरक्षाबलों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं। इतना ही नहीं, मुखबिरी करने वाले ग्रामीणों को भी वे टारगेट कर रहे हैं।
सात ऑपरेशन, सिर्फ दो सफल
सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में 7 से अधिक बड़े ऑपरेशन चलाए गए, जिनमें से केवल दो ही सफल हो पाए। नारायणपुर में महाराष्ट्र सीमा पर चला ऑपरेशन, जिसमें छह नक्सली ढेर किए गए, उसमें भी सुरक्षाबलों को पहाड़ियों और घने जंगलों में दो दिन तक संघर्ष करना पड़ा।
आईजी ने दिए सख्त निर्देश
आईजी बस्तर सुंदरराज पी ने माना कि जवानों की सोशल मीडिया पर सक्रियता सुरक्षा में बड़ी चूक का कारण बन रही है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि ऐसे सभी अकाउंट्स की पहचान कर बंद किया जाए जो ऑपरेशन के दौरान डिजिटल गतिविधियों में शामिल हैं।
ऑपरेशन प्रोटोकॉल का उल्लंघन
आईजी ने यह भी बताया कि कई बार मुठभेड़ के दौरान ही वीडियो रिकॉर्डिंग की घटनाएं सामने आई हैं, जो न केवल सुरक्षा बलों के लिए जोखिम भरी हैं, बल्कि नियमों का उल्लंघन भी हैं। पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि अब से ऐसे मामलों में संबंधित जवानों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।









