तियानजिन (चीन): शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की सोच और दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि SCO की नई परिभाषा तीन स्तंभों पर आधारित है – S का मतलब सिक्योरिटी, C का मतलब कनेक्टिविटी और O का मतलब अपॉर्च्युनिटी।
आतंकवाद पर दो टूक
अपने भाषण में पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा,
“भारत लंबे समय से आतंकवाद का शिकार रहा है। कितनी माताओं ने अपने बेटे खो दिए, कितने बच्चे अनाथ हो गए। पहलगाम की घटना ने हमें एक बार फिर झकझोर दिया। यह हमला सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरी मानवता पर था।”
मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद को लेकर किसी भी तरह का डबल स्टैंडर्ड स्वीकार नहीं किया जाएगा और सभी देशों को एक सुर में इस खतरे का मुकाबला करना होगा।
कनेक्टिविटी से विश्वास और विकास
प्रधानमंत्री ने कहा कि सशक्त कनेक्टिविटी सिर्फ व्यापार का ही नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और विकास का रास्ता भी खोलती है। भारत चाबहार पोर्ट और नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं को इसी सोच के साथ आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि हर कनेक्टिविटी प्रयास में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना जरूरी है।
भारत की विकास यात्रा और अवसर
मोदी ने बताया कि भारत “Reform, Perform and Transform” के मंत्र पर काम कर रहा है। वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारत ने नए अवसरों का मार्ग खोला है। उन्होंने SCO देशों को भारत की इस विकास यात्रा में साझेदार बनने का निमंत्रण दिया।
प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि 2023 की भारत अध्यक्षता के दौरान संगठन में स्टार्ट-अप्स, इनोवेशन, पारंपरिक चिकित्सा, डिजिटल समावेशन और बौद्ध धरोहर जैसे विषयों को जोड़ा गया।
सांस्कृतिक संवाद का प्रस्ताव
लोगों के बीच जुड़ाव को और मजबूत करने के लिए मोदी ने SCO के तहत एक “सभ्यतागत संवाद मंच” बनाने का सुझाव दिया, जहां सदस्य देश अपनी प्राचीन सभ्यताओं, कला, साहित्य और परंपराओं को साझा कर सकें।
SCO समिट में पीएम मोदी का संदेश साफ था – आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता, कनेक्टिविटी के जरिए विश्वास और विकास, और नए अवसरों के माध्यम से साझा प्रगति। उन्होंने कहा कि यही संगठन को भविष्य की दिशा देगा।









