भानुप्रतापपुर (अंतागढ़ परियोजना मंडल) के हाहालद्बी गांव में वन विकास निगम और वन विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है।
ग्रामीण सरवन पोटाई के अनुसार, मकान निर्माण के दौरान एक नग साझा लकड़ी काटी गई थी, जिसे वन विभाग के कर्मचारियों ने जब्त कर डिपो में जमा करा दिया। इसके बाद विभाग के कर्मचारियों द्वारा उनसे 25,000 रुपये (पी.ओ.आर. शुल्क) वसूले गए।
ग्रामीणों का आरोप है कि वसूली के बाद जो रसीद दी गई है, उसमें किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी के हस्ताक्षर नहीं हैं, जिससे लेन-देन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब एक छोटे मामले में किसान से हजारों रुपये का जुर्माना लिया जा रहा है, तो बीट क्षेत्र में कथित रूप से कटे हजारों सागौन पेड़ों पर कोई कार्रवाई या जुर्माना क्यों नहीं लगाया जा रहा है।
इस पूरे मामले की निष्पक्ष वन जांच (जंगल जांच) की मांग ग्रामीणों द्वारा लिखित आवेदन के माध्यम से संबंधित विभाग को की गई है, लेकिन अब तक जांच शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द जांच नहीं हुई तो वे आगे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने को मजबूर होंगे।







