जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
जिला जांजगीर चांपा जिला जांजगीर-चांपा मुख्यालय में इन दिनों चल रहा तथाकथित “चावल उत्सव” अब सवालों के घेरे में आ गया है। एक ओर जहां शासन द्वारा तीन महीने का चावल वितरण कर अपनी उपलब्धि गिनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली शक्कर नामक का कहीं अता-पता नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि योजनाओं का क्रियान्वयन कागजों में भले ही सफल दिखाया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
स्थानीय नागरिकों और हितग्राहियों का आरोप है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाली शक्कर लंबे समय से नहीं दी जा रही है। गरीब और जरूरतमंद परिवार, जो सरकार की इस योजना पर निर्भर हैं, वे बार-बार राशन दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता है। यह स्थिति प्रशासन की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

भाजपा सरकार द्वारा “चावल उत्सव” जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कर वाहवाही लूटने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जब बुनियादी खाद्य सामग्री ही उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रही है, तो ऐसे आयोजनों का क्या औचित्य रह जाता है? क्या यह सिर्फ दिखावा है, या फिर भ्रष्टाचार की एक नई परत?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शक्कर वितरण में हो रही इस लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या संबंधित विभाग और अधिकारी इस पर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
जनता अब जवाब चाहती है। जरूरत है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों को सबक मिल सके।
यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह “चावल उत्सव” जनता के लिए राहत नहीं, बल्कि एक बड़ा मजाक बनकर रह जाएगा।







