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शिक्षक राजू पुजारी मौत के मामले ने पकड़ा तूल, हजारों ग्रामीण उतरे सड़क पर

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-आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दिया अल्टीमेटम =

-पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल, एक हफ्ते में कार्रवाई न हुई तो होगा उग्र आंदोलन =

अर्जुन झा/जगदलपुर। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के चेरपाल निवासी और प्राथमिक शाला पालनार के शिक्षक राजू पुजारी की संदिग्ध मौत के मामला अब और तूल पकड़ चुका है। राजू पुजारी के परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए हजारों लोग सड़क पर उतर आए। बीजापुर जिला मुख्यालय में बड़ा प्रदर्शन किया गया।

तेलंगा समाज के नेतृत्व में आयोजित इस रैली को सर्व आदिवासी समाज, महार, महारा और कलार समाज का समर्थन मिला, जिससे आंदोलन बड़े जनसमूह में तब्दील हो गया। प्रदर्शन में 5 हजार से अधिक ग्रामीण शामिल हुए। मिनी स्टेडियम से प्रारंभ हुई रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान न्याय की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की गई और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया गया।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राजू पुजारी की मौत के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली संदिग्ध है। उनका कहना है कि राजू पुजारी के सुसाइड नोट में तीन लोगों के नाम सामने आने के बावजूद अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। समाज के प्रतिनिधियों ने मामले की न्यायिक जांच कराने, जिला पुलिस अधीक्षक की सीधी निगरानी में जांच सुनिश्चित करने तथा दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को शासकीय नौकरी देने की मांग भी की गई।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों के लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा। प्रदर्शन में तेलंगा समाज के अध्यक्ष आदिनारायण पुजारी, दिनेश पुजारी, सर्व आदिवासी समाज के सचिव कमलेश पैंकरा, महार समाज के अध्यक्ष अजय दुर्गम, कलार समाज के गौतम राव, अमित कोरसा, कामेश्वर दुब्बा, बीआर अमान, सुरेश परतागिरी, सन्नू हेमला, ईश्वरलाल सोनी, रैमनदास झाड़ी, कैलाश रामटेके, सतीश झाड़ी, मंगल रोटेल, सुबोध पुजारी, पुरुषोत्तम कुड़मुल, पुरुषोत्तम सल्लूर, विजय झाड़ी, कृष्णा बोल्ली, रामसिंग वार्गेम, पीलूराम पुजारी, तिरुपति लिंगम, अनिता मद्देड़, अनिता पुजारी, बसंती लिंगम सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी, पीड़ित परिवार के सदस्य एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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