आरंग संवाददाता – सोमन साहू
आरंग/ भारतीय संस्कृति की प्राचीन विरासत को सहेजने के उद्देश्य से भारत सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा संचालित ज्ञान भारतम मिशन के तहत आरंग में एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। जिला कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के मार्गदर्शन में चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान अग्रवाल पारा निवासी व्यवसायी दीपक साहेब और उनकी धर्मपत्नी शिक्षिका शीला गुरु गोस्वामी के घर से लगभग 100 साल पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी आरंग दिनेश शर्मा को जानकारी देते हुए गुरु गोस्वामी परिवार ने बताया कि ये अनमोल पांडुलिपियां उनके परदादा स्व. भैया साहेब एवं स्व. भाऊ साहेब द्वारा स्वयं लिखी गई थीं।
उस दौर में उनके पूर्वज सात्विक ज्ञान यज्ञ, सत्संग, चौका और आरती जैसे आध्यात्मिक कार्यों में लीन रहते थे।
आज के आधुनिक युग में भी इन पांडुलिपियों में समाहित ज्ञान भारतीय संस्कृति और परंपराओं का गौरव गान कर रहा है।
उनका प्रमुख धर्म क्षेत्र छत्तीसगढ़ का
प्रसिद्ध तीर्थ दामाखेड़ा है। यह पांडुलिपियां न केवल पारिवारिक धरोहर हैं, बल्कि कबीर पंथ और छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक इतिहास के लिए भी शोध का विषय हो सकती हैं।
आरंग विकासखंड में दुर्लभ पांडुलिपियों को खोजने और उनके संरक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है। इस उपलब्धि के दौरान:
विकासखंड स्त्रोत समन्वयक सुरेंद्र सिंह चंद्रसेन और नवाचारी शिक्षक गण महेंद्र कुमार पटेल एवं अरविंद कुमार वैष्णव सक्रिय रूप से शामिल रहे।
प्रशासन का लक्ष्य इन दुर्लभ दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करना है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें ।








