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परम पूज्य 1008 यतिप्रवर दण्डी स्वामी इन्दूभवानन्द तीर्थ जी महाराज जी ने श्री परशुराम पुरोहित वैदिक संस्थान के कार्यों की सराहना की, शास्त्रसम्मत भागवत परंपरा पर दिया विशेष संदेश

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सोमन साहू/आरंग। श्री बागेश्वर नाथ महादेव मंदिर प्रांगण, आरंग में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित सप्त दिवसीय श्री रामचरितमानस महायज्ञ के दौरान परम पूज्य दण्डी स्वामी इन्दूभवानन्द महाराज जी का दिव्य सान्निध्य प्राप्त हुआ। महायज्ञ की वैदिक व्यवस्था, अनुशासन, श्रद्धालुओं की सहभागिता एवं सनातन धर्म के प्रति समर्पण को देखकर महाराज श्री अत्यंत प्रसन्न हुए तथा श्री परशुराम पुरोहित वैदिक संस्थान, आरंग द्वारा किए जा रहे धर्म एवं समाजहित के कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

महाराज श्री ने संस्थान के संस्थापक एवं समन्वयक पं. अविनाश शर्मा के प्रयासों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि अल्पायु में धर्म, संस्कृति एवं वैदिक परंपराओं के संरक्षण के लिए उनका समर्पण प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि संस्थान जिस प्रकार सनातन धर्म जागरण, वैदिक संस्कारों के संरक्षण एवं सामाजिक समरसता के लिए कार्य कर रहा है, वह अत्यंत प्रशंसनीय है। महाराज श्री ने भविष्य में भी संस्थान के साथ जुड़े रहने तथा धर्मकार्य एवं सनातन उत्थान के अभियानों में अपना मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

महायज्ञ में श्री परशुराम पुरोहित वैदिक संस्थान के मुख्य सलाहकार आचार्य पं. नरेंद्र द्विवेदी जी ने उद्गाता के रूप में वैदिक अनुष्ठानों का संचालन किया। संस्थान के अध्यक्ष आचार्य पं. ध्रुव नारायण शुक्ला जी ने ब्रह्मा के रूप में संपूर्ण यज्ञीय कार्यों का मार्गदर्शन किया तथा संस्थान के सचिव पं. राजेश शर्मा जी ने मुख्य यजमान के रूप में महायज्ञ को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अवसर पर महाराज श्री ने अपने उद्बोधन में श्रीमद्भागवत महापुराण की शास्त्रीय परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शास्त्रों में भागवत कथा का मूल विधान सप्त-दिवसीय (सप्ताह) स्वरूप में वर्णित है। उन्होंने स्कंदपुराण में वर्णित प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भक्ति के दुःख निवारण हेतु देवर्षि नारद ने सनक, सनंदन, सनातन एवं सनत्कुमार से मार्गदर्शन प्राप्त किया, तब उन्हें “सप्ताह वाचनं कुरु” का उपदेश दिया गया। इसी प्रकार धुंधकारी की मुक्ति के लिए गोकर्ण जी द्वारा सात दिवस तक श्रीमद्भागवत कथा श्रवण कराने का विधान शास्त्रों में वर्णित है।

महाराज श्री ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा एवं शास्त्रों में श्रीमद्भागवत महापुराण का विधान सात दिवस का ही प्राप्त होता है। यदि कोई विद्वान एक ही दिवस में गीता अथवा भागवत के श्लोकों का संपूर्ण पाठ करना चाहे, तो उसे अखंड गीता पाठ अथवा भागवत पाठ कहा जा सकता है, किंतु शास्त्रीय दृष्टि से उसे एक दिवसीय श्रीमद्भागवत सप्ताह नहीं कहा जाना चाहिए। सनातन धर्म में शास्त्रसम्मत परंपराओं का पालन ही धर्म की मर्यादा एवं प्रामाणिकता का आधार है।

उल्लेखनीय है कि महायज्ञ के सफल संचालन हेतु गठित सर्व सनातनी समाज आयोजन समिति में रमन जलक्षत्री, बलराम जलक्षत्री एवं भरत जलक्षत्री संरक्षक, डॉ. तेजराम जलक्षत्री व्यवस्था प्रमुख, लक्ष्मीचंद लोधी अध्यक्ष, हेमंत गुप्ता उपाध्यक्ष, दीपक जलक्षत्री सचिव, लक्ष्मण पाल सहसचिव, रूपेश जलक्षत्री कोषाध्यक्ष, अविनाश (विक्की) साहू उप कोषाध्यक्ष तथा जगमोहन सोनकर एवं ईश्वर पटेल (पार्षद, वार्ड क्रमांक 4) सलाहकार के रूप में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान किए।
महायज्ञ में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु कथा, यज्ञ, परिक्रमा एवं धर्मश्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। संपूर्ण बागेश्वर नाथ महादेव मंदिर प्रांगण वैदिक मंत्रोच्चार, रामनाम एवं भक्तिमय वातावरण से आरंग नगरी आलोकित हो उठा।

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