सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 719 अंक टूटकर 73,524 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 244 अंक की गिरावट के साथ 23,123 पर आ गया। दिनभर बाजार में दबाव बना रहा और अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
क्यों टूटा बाजार?
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों में कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके अलावा विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई दिया।
मेटल और रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित
सोमवार के कारोबार में मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली दर्ज की गई। कई रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में 4 से 6 प्रतिशत तक की गिरावट आई, जबकि मेटल कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। आईटी और ऑटो सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली।
निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका
बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी दर्ज की गई। बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में लाखों करोड़ रुपये की गिरावट आई, जिससे छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा। �
दिन में सुधार की कोशिश, लेकिन अंत में नुकसान
कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स अपने निचले स्तर से करीब 500 अंकों तक संभलता दिखा, लेकिन अंतिम घंटों में फिर बिकवाली बढ़ गई। नतीजतन बाजार दिन के अंत में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि वैश्विक हालात में सुधार नहीं होता है तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय सोच-समझकर निवेश रणनीति बनाने की सलाह दी जा रही है।








