सरगुजा संवाददाता – विकास अग्रवाल
लखनपुर।
कृषि विज्ञान केंद्र अंबिकापुर के तत्वाधान में ग्राम तीरकेला में पारंपरिक बीजों के आदान-प्रदान हेतु एक दिवसीय कार्यक्रम शिविर का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर किसानों को जैविक एवं पोषक संतुलित खेती के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रचार वाहन के माध्यम से गांव-गांव पहुंचकर किसानों को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, संतुलित खाद के उपयोग तथा उत्पादन में वृद्धि की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने तथा भूमि की सेहत बनाए रखने के लिए प्रेरित करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक एवं संतुलित खेती से न केवल फसल उत्पादन बढ़ता है बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी सुधरती है।
कार्यक्रम में पारंपरिक देशी खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के पारंपरिक बीजों का आदान-प्रदान किया गया। साथ ही मडुवा रोटी पर देसी फसलों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य स्थानीय धान, मक्का, उड़द, दलहन, तिलहन तथा अन्य प्राकृतिक सब्जी-भाजी की खेती को बढ़ावा देना है।

मुख्य अतिथि: डॉ. संदीप शर्मा (कृषि विज्ञान केंद्र, अंबिकापुर)
डॉ. राजेश चौकसे (सीतापुर)
अजय बरवा, राजेंद्र बघेल एवं विनय बघेल (सहायक क्षेत्र समन्वयक)
बृजलाल पैकरा (वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी)
जी. सी. घृतलहरे
तिरकेला सरपंच श्रीमती होबिला एक्का
सामाजिक कार्यकर्ता आइजक कुजूर
पूर्व सरपंच नेवलसाय कुजूर एवं अमृत एक्का
इस अवसर पर भीनसरिया माझी समाज मैनपाट का भी विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय किसानों में जैविक खेती तथा पारंपरिक बीजों को अपनाने की प्रेरणा मिली।








