कोरबा, 16 जून 2026।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, क्षेत्रीय कार्यालय कोरबा द्वारा जारी पत्र क्रमांक 698/क्षे.का./छ.प्र.प.सं.म./2026 दिनांक 11 जून 2026 के अनुसार, हसदेव ताप विद्युत गृह (पूर्व), कोरबा के ऐश डाइक में दरार आने तथा राखयुक्त जल के बहाव से जल प्रदूषण की शिकायत पर जांच एवं कार्रवाई की गई है।
शिकायतकर्ता श्री शशांक दुबे, जिलाध्यक्ष इंटक द्वारा की गई शिकायत में बताया गया था कि मैसर्स छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL), हसदेव ताप विद्युत गृह, कोरबा (पूर्व) के ऐश डाइक में दरार होने के कारण बड़ी मात्रा में राखयुक्त जल बाहर निकलकर आसपास के क्षेत्रों एवं जल स्रोतों की ओर प्रवाहित हो रहा है, जिससे पर्यावरण एवं जल प्रदूषण की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है।
पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा 18 मार्च 2026 को ऐश डाइक का निरीक्षण किया गया, जिसमें ऐश डाइक से राख के निरंतर रिसाव एवं राखयुक्त जल के बहाव की स्थिति पाई गई। इसके बाद जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत संयंत्र प्रबंधन को नोटिस जारी कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
पुनः 19 अप्रैल 2026 को किए गए निरीक्षण में ऐश डाइक से अत्यधिक मात्रा में राख का रिसाव एवं हसदेव बैराज क्षेत्र में राखयुक्त जल के बहाव की स्थिति देखी गई। इसके आधार पर 22 अप्रैल 2026 को संयंत्र प्रबंधन को तत्काल सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु पुनः निर्देशित किया गया।
संयंत्र प्रबंधन ने अपने जवाब में ऐश डाइक के लैगून-बी की क्षतिग्रस्त स्थिति के कारण ऐश स्लरी डिस्चार्ज को अस्थायी रूप से बंद किए जाने तथा मरम्मत कार्य प्रारंभ किए जाने की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त 20 मई 2026 को कार्यपालन अभियंता द्वारा निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें 25 अप्रैल 2026 को हसदेव बैराज क्षेत्र में राखयुक्त जल के प्रवाह बंद होने की जानकारी दी गई।
हालांकि, पर्यावरण संरक्षण मंडल ने माना कि 18 मार्च 2026 से 25 अप्रैल 2026 तक पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हुआ, जिसके कारण संयंत्र के विरुद्ध ₹27,60,000 (सत्ताईस लाख साठ हजार रुपये) की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई है।
इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण मंडल ने संयंत्र प्रबंधन को निर्देशित किया है कि:
१. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्थायी संरचनात्मक एवं संचालनात्मक उपाय सुनिश्चित किए जाएं।
२. ऐश डाइक संरचना की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
३. प्रभावित लैगून-बी में ऐश स्लरी का निस्तारण प्रारंभ करने से पूर्व मंडल को सूचित किया जाए।
४. सभी आवश्यक पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए।
गौरतलब है कि इससे पूर्व भी ऐश डाइक टूटने की घटना के कारण हसदेव नदी एवं आसपास के जल स्रोतों में प्रदूषण फैलने पर संयंत्र पर करोड़ों रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद पुनः ऐसी घटना सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।
शिकायतकर्ता शशांक दुबे द्वारा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), जिला प्रशासन तथा जल संसाधन विभाग को शिकायत भेजकर ऐश डाइक को तत्काल बंद करने, स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की गई थीं, जिसमें पर्यावरण विभाग द्वारा की गई कार्यवाही से शिकायतकर्ता को अवगत कराया गया है, जल संसाधन विभाग द्वारा उक्त संबंध में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HTPP) पर अब दिनांक तक क्या कार्यवाही की गई है, इस संबंध में कोई भी जानकारी प्रेषित नहीं की गई है, गौरतलब हैं, कि बार बार ऐश डाईक में रिसाव से पूरे जिले की जल आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हुई थी, तथा पूर्व में जल संसाधन विभाग द्वारा इस संबंध में 18 करोड़ रुपये की शास्ति कंपनी पर लगाई गई थीं, परंतु दुबारा इस प्रकार से कंपनी प्रबंधन की लापरवाही से हुए दुर्घटना के संबंध में जल संसाधन विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गई है, इस संबंध में कोई भी बयान या रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया है।
जारीकर्ता:
शशांक दुबे
जिला अध्यक्ष, INTUC, कोरबा
कोरबा, छत्तीसगढ़।








