Home चर्चा में खारुन ओवरब्रिज की बदहाली का सच 16 करोड़ का खर्च और दो...

खारुन ओवरब्रिज की बदहाली का सच 16 करोड़ का खर्च और दो महीने में ही उखड़ी सड़क की कहानी

8
0
रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर के प्रमुख खारुन ओवरब्रिज पर सफर करना अब जोखिम भरा हो गया है। हाल ही में की गई करोड़ों की मरम्मत के बावजूद सड़क की स्थिति बदतर हो गई है। महज दो महीने पहले ही इस ब्रिज का कायाकल्प करने का दावा किया गया था, लेकिन पहली बारिश की पहली फुहारों ने ही निर्माण कार्यों की पोल खोलकर रख दी है। आज स्थिति यह है कि ओवरब्रिज पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हो चुके हैं, जिसके कारण वाहन चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे मामले में ठेकेदार की बड़ी लापरवाही और संबंधित अधिकारियों की उदासीनता साफ झलकती है। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से इस ओवरब्रिज की मरम्मत कराई गई थी। काम को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए ब्रिज के एक हिस्से को 15 दिनों तक पूरी तरह से बंद रखा गया था और ट्रैफिक को दूसरे रास्तों पर डायवर्ट किया गया था। यह मरम्मत कार्य 1 अप्रैल से शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य आम जनता को एक सुरक्षित और सुगम रास्ता देना था। हालांकि, हकीकत यह है कि दो महीने बाद ही नई सड़क डामर छोड़ चुकी है और उखड़ने लगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विफलता का सबसे बड़ा कारण ड्रेनेज सिस्टम का सही न होना है। मरम्मत के दौरान ब्रिज पर जल निकासी की व्यवस्था को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि बारिश का पानी सड़क पर ही जमा हो गया और नमी के कारण डामर की पकड़ ढीली पड़ गई। पानी के जमाव ने सड़क को भीतर से खोखला कर दिया है, जिसके चलते भारी वाहनों के गुजरते ही सड़क पर गड्ढे उभर आए हैं।
इस समस्या से रोजाना लगभग डेढ़ लाख वाहन चालकों को जूझना पड़ रहा है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में जब गाड़ियां इस ब्रिज से गुजरती हैं, तो गड्ढों के कारण उनकी रफ्तार बेहद धीमी हो जाती है। हिचकोले खाती गाड़ियों के कारण अक्सर यहां जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे लोगों का समय बर्बाद हो रहा है। तेज रफ्तार में चलने वाले दोपहिया वाहनों के लिए तो यह जगह किसी खतरे से कम नहीं है, क्योंकि अचानक गड्ढों के सामने आने से दुर्घटना की संभावना हमेशा बनी रहती है।
जनता का सवाल है कि आखिर 16 करोड़ का बजट कहां खर्च हुआ? यदि काम की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि वह दो महीने भी नहीं टिक सकी, तो इसकी जवाबदेही किसकी है? ठेकेदार द्वारा काम में उपयोग की गई सामग्री और निर्माण के दौरान अधिकारियों द्वारा की गई मॉनिटरिंग पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या सिर्फ खानापूर्ति के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च की गई थी?
प्रशासन को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए न केवल ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि दोषी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही, बिना देरी किए ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करवाकर सड़क की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत की जानी चाहिए ताकि आम जनता को इस परेशानी से मुक्ति मिल सके। यह घटना सरकारी निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्या शासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भविष्य के लिए कोई पुख्ता कदम उठाएगा?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here