संघर्षविराम के बाद पहली बड़ी सैन्य झड़प, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा युद्ध का खतरा; वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर गहराया संकट।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले किए, जिसके बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और वाणिज्यिक जहाज पर हमला होने से पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।
अमेरिका ने क्यों किया हमला?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक वाणिज्यिक जहाज पर ड्रोन हमले के जवाब में ईरान के मिसाइल, ड्रोन, रडार और अन्य सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की गई। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ईरान का पलटवार, कुवैत और बहरीन बने निशाना
हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार बड़े पैमाने पर नुकसान या अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर जहाज पर हमला
तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर भी अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा, लेकिन सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं। इस घटना के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरा गई है।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी हितों या अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले जारी रहे तो अमेरिका और भी कठोर सैन्य कार्रवाई करेगा। वहीं अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि क्षेत्र में उसकी सैन्य मौजूदगी बरकरार रहेगी।
दुनिया की बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला जारी रहा तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है।








