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स्थानांतरण आदेश की खुली अवहेलना या प्रशासनिक शिथिलता? DIET जांजगीर में प्रभार हस्तांतरण अटका, शासन की साख पर उठे सवाल

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जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) जांजगीर में सामने आए एक प्रशासनिक प्रकरण ने स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी प्रभारी प्राचार्य भुनेश्वर प्रसाद साहू को आज तक विधिवत कार्यमुक्त नहीं किया गया है। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने किसी अन्य अधिकारी को प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रभार भी नहीं सौंपा, जिससे संस्थान के कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
यदि ये आरोप सही हैं, तो यह केवल एक अधिकारी के स्थानांतरण का मामला नहीं, बल्कि शासन के आदेशों के पालन, प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।

11 जून को जारी हुआ स्थानांतरण आदेश, फिर भी नहीं हुआ पालन
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 11 जून 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश के अनुसार श्री साहू की प्रतिनियुक्ति समाप्त करते हुए उन्हें उनके मूल पद पर पदस्थ किया गया था। सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार ऐसे आदेश के बाद संबंधित अधिकारी को तत्काल कार्यमुक्त होकर नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना चाहिए।
लेकिन आरोप है कि आदेश के कई दिन बाद भी न तो विधिवत प्रभार हस्तांतरित किया गया और न ही स्थानांतरण प्रक्रिया पूर्ण हुई।

कर्मचारियों ने लिखित आवेदन देकर मांगी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार DIET जांजगीर के कर्मचारियों ने उच्च अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर प्रभारी प्राचार्य को एकतरफा कार्यमुक्त करने तथा संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु करने का आग्रह किया है।
कर्मचारियों का कहना है कि जब स्थानांतरण आदेश प्रभावी हो चुका है, तब संस्थान को बिना नियमित प्रशासनिक नेतृत्व के नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि इस स्थिति के कारण कार्यालयीन निर्णय, वित्तीय स्वीकृतियां और प्रशिक्षण संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ रहा असर
DIET शिक्षक प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण संस्था है। यहां से संचालित होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यालयीन कार्य, वित्तीय प्रक्रियाएं और अन्य प्रशासनिक गतिविधियां प्राचार्य के स्तर से संचालित होती हैं।
यदि किसी कारणवश प्राचार्य का पद प्रभावी रूप से रिक्त रहता है अथवा विधिवत प्रभार हस्तांतरण नहीं होता, तो पूरी संस्था की कार्यप्रणाली प्रभावित होना स्वाभाविक है। कर्मचारियों के अनुसार वर्तमान स्थिति में कई महत्वपूर्ण कार्य लंबित हैं।

अनुपस्थिति और अवकाश को लेकर भी उठ रहे प्रश्न
चर्चा है कि संबंधित अधिकारी द्वारा अर्जित एवं चिकित्सा अवकाश का आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृति नहीं मिली। इसके बावजूद 16 जून के बाद उनकी उपस्थिति नहीं होने की बात कही जा रही है।
यदि विभागीय जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल स्थानांतरण आदेश की अवहेलना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिना स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थिति और शासकीय नियमों के उल्लंघन का विषय भी बन सकता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।

शासन से निष्पक्ष जांच की मांग
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर निम्न बिंदुओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए—
क्या स्थानांतरण आदेश का समय पर पालन हुआ?
क्या संबंधित अधिकारी ने विधिवत प्रभार हस्तांतरित किया?
क्या अवकाश आवेदन स्वीकृत था?
यदि नहीं, तो अब तक आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कर्मचारियों द्वारा दिए गए आवेदन पर उच्च अधिकारियों ने क्या निर्णय लिया?

प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखना आवश्यक
शासकीय व्यवस्था नियमों और जवाबदेही पर आधारित होती है। यदि किसी भी स्तर पर स्थानांतरण आदेशों के पालन में शिथिलता बरती जाती है, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव पूरे प्रशासनिक तंत्र पर पड़ता है। इसलिए आवश्यक है कि शिक्षा विभाग इस मामले में शीघ्र तथ्यात्मक जांच कराए और जांच के निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे।
यदि आरोप निराधार हैं, तो विभाग को स्थिति स्पष्ट कर भ्रम दूर करना चाहिए। वहीं यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सेवा नियमों के अनुसार उचित विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल पूरे जिले की निगाहें स्कूल शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। कर्मचारियों द्वारा दिए गए लिखित आवेदन पर क्या कार्रवाई होती है, स्थानांतरण आदेश का पालन कब सुनिश्चित होगा और DIET जांजगीर की प्रशासनिक व्यवस्था कब सामान्य होगी—इन प्रश्नों के उत्तर का सभी को इंतजार है।

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