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पुरी रथ यात्रा के दौरान मची भीषण भगदड़, कई लोग हुए घायल, सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल

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रघुराज –

ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान एक बेहद दुखद और खौफनाक हादसा सामने आया है। भगवान जगन्नाथ की पवित्र पहांडी रस्म के दौरान ग्रैंड रोड पर बने मार्केट चौक और मरीची कोर्ट चौक के बीच अचानक एक भीषण भगदड़ मच गई। इस अचानक मची अफरातफरी के कारण वहां मौजूद श्रद्धालुओं में चीख-पुकार मच गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में एक सौ से लेकर दो सौ से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर सामने आ रही है। सुरक्षा के बाहरी घेरे से महज पांच सौ मीटर की दूरी पर हुए इस हादसे ने प्रशासन के दावों और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि इस हादसे में घायल होने वाले लोगों में बड़ी संख्या महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की है, जो भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए भारी श्रद्धा के साथ वहां पहुंचे थे। जैसे ही भगदड़ मची, चारों तरफ कोहराम मच गया और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे। मौके पर मौजूद पुलिस बल और सेवादारों ने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश की। बचाव दलों को तुरंत सक्रिय किया गया और सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनके उपचार में जुटी हुई है। कुछ सूत्रों के अनुसार इस घटना में एक व्यक्ति की मौत की खबर भी सामने आ रही है, जिसने इस धार्मिक उत्सव के माहौल को गमगीन कर दिया है।

यह हादसा उस समय हुआ जब पुरी में नौ दिनों तक चलने वाली वार्षिक रथ यात्रा की शुरुआत के तहत पहांडी की रस्म निभाई जा रही थी। लगातार हो रही बारिश और लाखों श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी के बीच यह पारंपरिक रस्म शुरू की गई थी। पहांडी की रस्म में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के विग्रहों को बारहवीं सदी के ऐतिहासिक पुरी मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकालकर उनके विशाल रथों तक ले जाया जाता है। इस दौरान पूरा माहौल घंटियों, शंखों और झांझ की दिव्य ध्वनियों से गूंज रहा था।

परंपरा के अनुसार, सबसे पहले चक्रराज सुदर्शन को मुख्य मंदिर से बाहर लाया गया और उन्हें देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ पर विराजमान किया गया। जानकारों के अनुसार, श्री सुदर्शन भगवान विष्णु का अस्त्र हैं, जिनकी पूजा पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में विशेष तौर पर की जाती है। इसके बाद भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई भगवान बलभद्र के विग्रह को भी सेवादारों द्वारा पूरे आदर और सुरक्षा के साथ उनके तालध्वज रथ पर स्थापित किया गया। देवी सुभद्रा के विग्रह को रथ तक ले जाते समय विशेष शैली अपनाई जाती है, जिसमें उनका मुख आकाश की ओर होता है। अंत में जब महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के विग्रह को मंदिर से बाहर लाया गया, तो पूरे रथ मार्ग यानी बड़ा डंडा पर मौजूद लाखों भक्तों की भावनाएं उमड़ पड़ीं। भक्तों ने अपने हाथ उठाकर और जय जगन्नाथ का गगनभेदी जयघोष करते हुए महाप्रभु का स्वागत किया।

इस पावन अवसर पर ओडिसी नर्तकों, लोक कलाकारों और विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने कालिया ठाकुर यानी भगवान जगन्नाथ के सामने अपनी सुंदर प्रस्तुतियां दीं। पहांडी अनुष्ठान के तहत इन तीनों देव विग्रहों को एक औपचारिक और भव्य जुलूस के साथ उनके संबंधित रथों तक लाया जाता है। ये विशाल रथ मंदिर के सिंह द्वार के सामने खड़े किए जाते हैं, जहां से इन्हें खींचकर ढाई किलोमीटर दूर स्थित श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है। इस बारहवीं सदी के मंदिर से थोड़ी दूरी पर स्थित श्री गुंडिचा मंदिर को इन देवी-देवताओं का जन्म स्थान माना जाता है, जहां वे नौ दिनों तक विश्राम करते हैं।

इस साल मंदिर प्रशासन के अनुसार रथ यात्रा के सभी मुख्य अनुष्ठान सुबह नौ बजे से शुरू हो गए थे। बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह चरम पर था और लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर जमा थे। लेकिन इस विशाल जनसैलाब के बीच अचानक मची भगदड़ ने उत्सव के रंग को फीका कर दिया है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने के बाद अब सोशल मीडिया पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब प्रशासन को पहले से पता था कि लाखों की भीड़ जुटने वाली है, तो भीड़ को नियंत्रित करने के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

फेसबुक पर इस खबर के सामने आने के बाद से ही लोग घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। इस दुर्घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा उपायों को लेकर जरा सी भी लापरवाही कितने बड़े हादसे का कारण बन सकती है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और रथ यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। पुलिस बल को और अधिक सतर्क कर दिया गया है ताकि आगे इस तरह की किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

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