रोशनी सोनी/बिलासपुर। मानसून की पहली मूसलाधार और लगातार हुई बारिश ने बिलासपुर शहर में विकास कार्यों और नगर निगम की तैयारियों की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है। पिछले 24 घंटों से जारी बारिश के कारण शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। प्रमुख सड़कें तालाब जैसी नजर आ रही हैं, जिससे आम लोगों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
सबसे ज्यादा परेशानी नगर निगम के विभिन्न वार्डों और शहर से लगे क्षेत्रों में देखने को मिली, जहां बारिश का पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया। कई परिवारों को घरों के भीतर पानी भरने से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कॉलोनियों, गलियों और मुख्य सड़कों पर लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रही।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकाला गया। प्रशासन और नगर निगम मानसून से पहले नालियों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष इंतजाम करने के दावे करते रहे हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश ने इन दावों की पोल खोल दी।
शहर में लगातार जनप्रतिनिधियों के दौरे, विकास योजनाओं की घोषणाएं और स्मार्ट सिटी के दावे भी इस बारिश के सामने फीके नजर आए। करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई इलाकों में बुनियादी व्यवस्थाएं चरमराती दिखाई दीं। अब लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मानसून की शुरुआत में ही शहर का यह हाल है, तो आने वाले दिनों में और अधिक बारिश होने पर स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।
हर बार दावे, हर बार नाकामी
नगर निगम हर वर्ष बारिश से पहले यह दावा करता है कि नालियों और नालों की सफाई पूरी कर ली गई है तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस वर्ष भी ऐसे ही दावे किए गए थे, लेकिन पहली ही मूसलाधार बारिश ने इन सभी दावों की हकीकत सामने ला दी। जलभराव, बदहाल सड़कें और घरों तक पहुंचा बारिश का पानी यह बताने के लिए काफी है कि मानसून पूर्व तैयारियां जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी रहीं।







