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दिल्ली में मोदी चुप तो प्रदेश में साय चुप: 56 इंच के सीने का दावा करने वाली सरकार युवाओं के आंसुओं पर निरुत्तर, भिलाई लोहा चोरी कांड के सवालों से पीछे मुड़कर भागे मुख्यमंत्री

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रायपुर संवाददाता – रघुराज
संसद से सड़क तक विपक्ष का प्रचंड प्रहार: जंतर मंतर पर निहत्थे छात्रों पर बर्बर बल प्रयोग और छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट में हजारों करोड़ के कबाड़ घोटाले पर केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह बेनकाब
दिल्ली की सत्ता के गलियारों से लेकर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर तक इस समय राजनीतिक भूचाल आया हुआ है। एक तरफ देश के दिल दिल्ली में जंतर मंतर पर युवाओं और छात्रों का अभूतपूर्व आंदोलन चल रहा है, तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) में हुए विशालकाय लोहा चोरी कांड को लेकर जनता का गुस्सा चरम पर है। दोनों ही मोर्चों पर सत्ता पक्ष के रवैये ने लोकतंत्र की बुनियाद को हिलाकर रख दिया है। विपक्ष ने केंद्र और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि जब-जब जनता, युवा और मीडिया तीखे सवाल पूछते हैं, तब-तब सत्ता में बैठे जिम्मेदार नेता जवाब देने के बजाय मैदान छोड़कर भाग खड़े होते हैं।

जंतर मंतर पर गूंजी युवाओं की चीख, संसद में पीएम मोदी की चुप्पी पर उठे सवाल

दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर मंतर पर देश के कोने-कोने से पहुंचे हजारों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं ने विशाल प्रदर्शन किया। युवाओं का कसूर सिर्फ इतना था कि वे अपनी नौकरियों, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए आवाज उठा रहे थे। लेकिन सत्ता के अहंकार में डूबी व्यवस्था ने इन निहत्थे और निर्दोष बच्चों पर पुलिस का बर्बर बल प्रयोग करवा दिया। पानी की बौछारें, लाठीचार्ज और घसीट-घसीट कर की गई गिरफ्तारियों ने देश को स्तब्ध कर दिया है।
इस बर्बरता की गूंज जब संसद के भीतर सुनाई दी और विपक्ष ने पुरजोर आवाज उठाते हुए प्रधानमंत्री से जवाब मांगा कि आखिर इन बेकसूर बच्चों पर इतना जुल्म क्यों ढाया गया, तो प्रधानमंत्री कोई संतोषजनक जवाब देने के बजाय संसद से उठकर चले गए। विपक्ष ने बेहद आक्रामक अंदाज में सवाल उठाया कि जो प्रधानमंत्री कभी प्रोटोकॉल तोड़कर जनता के बीच जाने के बड़े-बड़े दावे करते थे, आज वही प्रधानमंत्री अपने देश के ही होनहार बच्चों के जायज सवालों से डरकर क्यों भाग खड़े हुए?
विपक्षी नेताओं ने 56 इंच के सीने के दावे पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आखिर कहां गया वह 56 इंच का सीना, जो आज देश के नौजवानों और बच्चों का दर्द समझने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है? जब देश का युवा सड़क पर लाठियां खा रहा है, रो रहा है और अपने भविष्य की भीख मांग रहा है, तब देश के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति चुप्पी साधकर बैठा है। यह चुप्पी इस बात का प्रमाण है कि सरकार के पास युवाओं के सवालों का कोई नैतिक जवाब नहीं बचा है।
भिलाई स्टील प्लांट में हजारों करोड़ का लोहा कांड: मीडिया के सवालों से पीछे मुड़कर भागे सीएम साय
दिल्ली में अगर प्रधानमंत्री चुप हैं, तो छत्तीसगढ़ में प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का रवैया भी उससे अलग नहीं है। छत्तीसगढ़ की शान कहे जाने वाले भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) से फ्लाई ऐश और डस्ट की आड़ में हजारों करोड़ रुपये के लोहा स्क्रैप की अवैध तस्करी और चोरी का मामला अब पूरे देश में तहलका मचा रहा है। पुलिस जांच में प्लांट के जनरल मैनेजर (जीएम) और एजीएम स्तर के अधिकारियों की संलिप्तता और कबाड़ माफिया का विशाल नेटवर्क उजागर हो चुका है।
यह कोई आम चोरी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संपत्ति की सरेआम डकैती है, जिसमें संयंत्र के बड़े-बड़े अधिकारी और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त माफिया शामिल हैं। लेकिन इस विशालकाय घोटाले पर जब मीडियाकर्मियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सवाल पूछे, तो वे जवाब देने के बजाय बिना एक शब्द बोले पीछे मुड़कर अपनी गाड़ी की तरफ निकल गए।
विपक्ष ने मुख्यमंत्री के इस आचरण पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश का मुखिया जब इतने बड़े भ्रष्टाचार के सवाल से कतराकर भागने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। भिलाई स्टील प्लांट राज्य और देश की बहुमूल्य संपत्ति है, और उसकी लूट पर मुख्यमंत्री की यह खामोशी साबित करती है कि सरकार कबाड़ माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने में जुटी हुई है।

दिल्ली से रायपुर तक एक ही पैटर्न: सवाल पूछो तो भाग जाओ

विपक्ष ने जंतर मंतर के छात्र आंदोलन और छत्तीसगढ़ के भिलाई लोहा चोरी कांड को जोड़ते हुए सरकार के इस रवैये को लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। विपक्ष का कहना है कि केंद्र में मोदी और छत्तीसगढ़ में साय, दोनों ही एक ही रास्ते पर चल रहे हैं। जब जनता काम का हिसाब मांगती है, जब छात्र रोजगार और सुरक्षा मांगते हैं, और जब मीडिया करोड़ों के घोटालों पर सवाल दागती है, तो दोनों सरकारों का एक ही जवाब होता है—मौन धारण कर लेना या सवाल से मुंह मोड़कर भाग जाना।
विपक्षी प्रवक्ताओं ने कहा कि यह सरकार केवल चुनावी भाषणों में बड़े-बड़े वादे करना जानती है, लेकिन जब धरातल पर जिम्मेदारी तय करने की बात आती है, तो इनके पास कोई जवाब नहीं होता। जंतर मंतर पर रोते हुए छात्रों के आंसू और भिलाई स्टील प्लांट से लुटती राष्ट्र की संपत्ति, दोनों ही इस बात की गवाही दे रहे हैं कि देश और प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं बची है।

संसद से सड़क तक विपक्ष का उग्र आंदोलन का ऐलान

विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह सरकार की इस दमनकारी और भ्रष्टाचारी नीतियों के आगे झुकने वाला नहीं है। दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में देशव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा और संसद के आगामी सत्रों में भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा जाएगा। विपक्ष ने मांग की है कि छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
वहीं दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ में विपक्ष ने भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी कांड की निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने और दोषी अधिकारियों व नेताओं को तत्काल जेल भेजने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री साय ने इस घोटाले पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी और कबाड़ माफिया पर बुलडोजर नहीं चलाया, तो पूरे प्रदेश में ब्लॉक स्तर से लेकर राजधानी रायपुर तक उग्र आंदोलन और घेराबंदी की जाएगी।

सत्ता का अहंकार या नाकामी का डर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई सरकार जनता के सीधे और जायज सवालों से कतराने लगती है, तो यह उसके पतन की शुरुआत होती है। देश के युवाओं को लाठियों से हांकना और राष्ट्रीय संपत्ति की लूट पर मौन साध लेना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की शोभा नहीं बढ़ाता।
56 इंच का सीना का दावा करने वाली सत्ता आज युवाओं के आंसुओं और जनता के सवालों के सामने पूरी तरह लाचार और निरुत्तर नजर आ रही है। दिल्ली से लेकर रायपुर तक गूंज रहा यह जनाक्रोश आने वाले समय में सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक तूफान बनने वाला है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार अपने अहंकार को छोड़कर जनता के सामने आकर जवाब देती है या फिर यह खामोशी सत्ता के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी।

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