-कुसमुंडा क्षेत्र में भीषण ट्रैफिक जाम से स्कूली बच्चों की परीक्षा प्रभावित, एसईसीएल और पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
गुरदीप सिंह/कोरबा/कुसमुंडा।
सुबह का समय… बच्चों के चेहरों पर टेस्ट देने का उत्साह था। कोई अपनी कॉपी दोहरा रहा था, कोई दोस्तों से सवाल पूछ रहा था। लेकिन जैसे ही स्कूल वाहन मुख्य सड़क पर पहुंचे, उनका उत्साह कुछ ही मिनटों में मायूसी में बदल गया। कुसमुंडा क्षेत्र में लगे भीषण ट्रैफिक जाम ने सैकड़ों स्कूली बच्चों को सड़क पर ही रोक दिया।

“मुझे स्कूल जाना है…”
लिखकर बच्चों ने लगाई गुहार
सबसे मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला जब कुछ बच्चों ने चार्ट पेपर पर “मुझे स्कूल जाना है” लिखकर विरोध और गुहार व्यक्त की। परीक्षा देने की जल्दी, समय निकलने की चिंता और जाम से निकलने की बेबसी बच्चों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी।
बार-बार एक ही सवाल—”अंकल, स्कूल कितनी देर में पहुंचेंगे?”
स्कूल वैन और ऑटो में बैठे बच्चे बार-बार ड्राइवर से यही पूछते रहे—
“अंकल, स्कूल कितनी देर में पहुंचेंगे?”
लेकिन ड्राइवरों के पास भी कोई जवाब नहीं था। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी और जाम खुलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे थे।
टेस्ट का तनाव, जाम का दर्द
इन दिनों अधिकांश स्कूलों में टेस्ट एवं मूल्यांकन परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे समय में देर से स्कूल पहुंचने की चिंता ने बच्चों का आत्मविश्वास और उत्साह दोनों कम कर दिया। कई बच्चे पूरे रास्ते बेचैन होकर स्कूल वाहन से बाहर झांकते रहे कि आखिर जाम कब खुलेगा।
स्कूल वाहनों की लंबी कतार, पूरा यातायात ठप
घर से निकलते ही मुख्य सड़क पर पहले से लगे जाम में स्कूल वैन, ऑटो और निजी वाहन फंस गए। स्कूल वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण जाम और भी विकराल हो गया। स्थिति ऐसी थी कि कई किलोमीटर तक वाहन रेंगते रहे।
नागरिकों ने संभाली व्यवस्था
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब काफी देर तक कोई राहत नहीं मिली तो कुछ जागरूक नागरिक स्वयं आगे आए और यातायात को व्यवस्थित करने का प्रयास किया। इसके बाद धीरे-धीरे जाम खुलना शुरू हुआ और स्कूली बच्चे अपने-अपने विद्यालयों तक पहुंच सके।
एसईसीएल और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुसमुंडा क्षेत्र में रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम के बावजूद एसईसीएल प्रबंधन और कुसमुंडा पुलिस की ओर से प्रभावी ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पहल नहीं की जा रही है। इसका खामियाजा सबसे अधिक स्कूली बच्चों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
बड़ा सवाल…
जब बच्चे अपनी पढ़ाई और भविष्य के लिए समय पर स्कूल पहुंचने की गुहार लगा रहे हों, तब क्या संबंधित विभागों की जिम्मेदारी नहीं बनती कि उन्हें सुरक्षित और समय पर विद्यालय पहुंचाने के लिए स्थायी ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित करें?
कुसमुंडा क्षेत्र के नागरिक अब इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।







