रायपुर संवाददाता – रघुराज
नवा रायपुर स्थित करोड़ों की लागत से निर्मित नए विधानसभा परिसर में निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल, हादसे के समय कमरा खाली रहने से टली बड़ी अनहोनी, मरम्मत का काम शुरू
छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर स्थित नवनिर्मित विधानसभा भवन परिसर में एक बड़ी प्रशासनिक और निर्माण से जुड़ी लापरवाही सामने आई है। नए विधानसभा भवन के भीतर मुख्य हॉल से लगे हुए एक वरिष्ठ अधिकारी के प्रशासनिक कक्ष की फॉल्स सीलिंग अचानक भरभरा कर नीचे आ गिरी। इस हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फॉल्स सीलिंग के साथ-साथ छत के सहारे टिके भारी-भरकम स्टील के पाइप, लोहे के फ्रेम और सपोर्टिंग एंगल्स भी पूरी ताकत के साथ फर्श पर आ गिरे। जब यह हादसा हुआ, उस दौरान कमरे के भीतर तेज धमाके जैसी आवाज गूंज उठी। गनीमत यह रही कि जिस समय यह घटना घटी, उस वक्त संबंधित अधिकारी या उनका कोई भी सहायक कर्मचारी कमरे में मौजूद नहीं था। कमरे के खाली रहने के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और किसी भी प्रकार की जनहानि या शारीरिक चोट की खबर नहीं आई। हालांकि, घटना के बाद कमरे के भीतर बिखरे मलबे, टूटी फॉल्स सीलिंग और मुड़े हुए स्टील पाइपों की तस्वीरों ने इस हाई-प्रोफाइल इमारत के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
हादसे के वक्त की स्थिति और प्रत्यक्षदर्शियों का अनुभव
घटना के संबंध में मिली जानकारियों के अनुसार, मुख्य हॉल से सटे इस अधिकारी कक्ष में सामान्य दिनों की तरह कामकाज संचालित होता है। हादसे वाले दिन अधिकारी किसी प्रशासनिक बैठक या अन्य कार्य के सिलसिले में अपने कक्ष से बाहर थे। अचानक परिसर के इस हिस्से में एक जोरदार आवाज सुनाई दी, जिसके बाद आसपास के अन्य कक्षों में मौजूद कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी तुरंत मौके की ओर दौड़े। जब उन्होंने कमरे का दरवाजा खोलकर देखा, तो अंदर का नजारा चौंकाने वाला था। पूरा कमरा सीमेंट के मलबे, प्लास्टर ऑफ पेरिस, भारी स्टील पाइपों और धातु के ढांचों से पटा पड़ा था। मेज और कुर्सियों के ऊपर फॉल्स सीलिंग के बड़े-बड़े टुकड़े गिरे हुए थे। यदि उस समय कमरे में कोई व्यक्ति बैठा होता, तो भारी स्टील के फ्रेम और पाइप सीधे सिर या शरीर पर गिरने से गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। घटना की जानकारी मिलते ही परिसर के सुरक्षा अधिकारी और प्रशासनिक अमला तुरंत मौके पर पहुंचा तथा सुरक्षा के दृष्टिकोण से संबंधित क्षेत्र को अस्थायी रूप से आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया।
आरटीआई से हुआ चौंकाने वाला खुलासा: नहीं है उपयोगिता प्रमाण पत्र
इस हादसे के सामने आते ही भवन के कानूनी और सुरक्षात्मक पहलुओं की पड़ताल तेज हो गई है। एक सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी से एक अत्यंत चौंकाने वाला और गंभीर मामला उजागर हुआ है। आरटीआई से प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, नवा रायपुर स्थित इस नए विधानसभा भवन को अभी तक संबंधित नगर तथा ग्राम निवेश या स्थानीय विकास प्राधिकरण से आधिकारिक उपयोगिता प्रमाण पत्र यानी ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (Occupancy Certificate) जारी ही नहीं किया गया है। नियमानुसार, किसी भी बहुमंजिला या सार्वजनिक महत्व की नई इमारत में कामकाज शुरू करने या उसका नियमित उपयोग करने से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त करना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है। यह प्रमाण पत्र इस बात की आधिकारिक गारंटी होता है कि इमारत का निर्माण तय सुरक्षा मानकों, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग गाइडलाइन्स और गुणवत्ता के मापदंडों के अनुसार हुआ है तथा वह इंसानी आवाजाही के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के करोड़ों रुपये की लागत वाली इस भव्य इमारत में नियमित कामकाज संचालित होना प्रशासनिक प्रक्रिया और नियमों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
नवा रायपुर अटल नगर में निर्मित यह नया विधानसभा भवन राज्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वीआईपी परिसर है। लगभग 324 करोड़ रुपये की भारी-भरकम बजट लागत से तैयार इस नए परिसर को अत्याधुनिक वास्तुकला, आधुनिक सुविधाओं और हरित तकनीक के प्रतीक के रूप में पेश किया गया था। लेकिन निर्माण और उपयोग के शुरुआती चरण में ही इस तरह की घटना का घटित होना निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह पैदा करता है। केवल प्लास्टर या सीलिंग की चादर का गिरना एक बात होती है, लेकिन उसके साथ भारी स्टील के पाइपों और धातु के फ्रेमों का उखड़कर नीचे आ जाना यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सीलिंग को मुख्य छत से जोड़ने में घटिया सामग्री, कमजोर एंकरिंग और अपर्याप्त इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया गया था। स्थानीय नागरिक, सुरक्षा विशेषज्ञ और प्रशासनिक क्षेत्र के जानकार अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या निर्माण के समय गुणवत्ता नियंत्रण की जांच नियमानुसार की गई थी? क्या निर्माण कार्य में मानक गुणवत्ता वाले स्टील और एंकर बोल्ट्स का प्रयोग किया गया था या फिर केवल ऊपरी चमक-धमक पर ध्यान केंद्रित किया गया?
मरम्मत कार्य शुरू और प्रशासनिक हलचल
घटना के तुरंत बाद संबंधित निर्माण विभाग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और निर्माण से जुड़ी ठेकेदार एजेंसी के तकनीशियनों की टीम मौके पर पहुंची। क्षतिग्रस्त कक्ष की स्थिति का जायजा लेने के बाद तुरंत मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया। संबंधित विभाग द्वारा आनन-फानन में क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करवाई जा रही है और नए सिरे से सीलिंग लगाने का कार्य शुरू किया गया है। सुरक्षा कारणों से आसपास के अन्य कक्षों की फॉल्स सीलिंग और छत के ढांचों की भी आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में इस प्रकार की किसी अन्य अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो। हालांकि, मीडिया और आम जनता में खबर फैलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारी इस मामले में कैमरे के सामने ज्यादा कुछ बोलने से बच रहे हैं और इसे एक मामूली तकनीकी खराबी बताकर मामले को शांत करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, मरम्मत का काम तेजी से पूरा कराने की कोशिश की जा रही है ताकि परिसर में होने वाली आगामी बैठकों और गतिविधियों पर इसका असर न पड़े।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और जवाबदेही की मांग
विधानसभा भवन राज्य के लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर माना जाता है, जहां प्रदेश भर के जनप्रतिनिधि और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी बैठकर जनता के भविष्य की नीतियां बनाते हैं। ऐसे में इतने संवेदनशील परिसर में इस प्रकार की सुरक्षा चूक ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। सामाजिक संगठनों और विपक्ष ने इस घटना को भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण का प्रत्यक्ष प्रमाण करार दिया है। आलोचकों का कहना है कि जिस इमारत में जनता के गाढ़े पसीने की कमाई के करोड़ों रुपये बहाए गए हों, वहां अगर फॉल्स सीलिंग और लोहे के भारी फ्रेम गिर रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर निर्माण कार्यों में हुई लापरवाही को उजागर करता है। विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही, जिन ठेकेदारों, इंजीनियरों और निगरानी अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाला जाए। इसके अतिरिक्त, आरटीआई में ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट न होने के खुलासे पर भी शासन-प्रशासन से सार्वजनिक जवाब मांगा जा रहा है।
नवा रायपुर के नए विधानसभा परिसर की पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद से ही एक सर्वसुविधायुक्त और भव्य विधानसभा भवन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। पूर्व में विधानसभा का संचालन रायपुर में स्थित विभिन्न अस्थायी भवनों से होता आ रहा था। नवा रायपुर अटल नगर में लगभग 51 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में इस नए विधानसभा भवन का निर्माण कराया गया। इसे छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, धान के कटोरे की थीम और आधुनिक स्थापत्य कला के संगम के रूप में डिजाइन किया गया था। परिसर में 200 से अधिक विधायकों के बैठने की क्षमता वाला मुख्य सदन, मंत्रियों के ब्लॉक, प्रशासनिक विंग, सेंट्रल हॉल, आधुनिक ऑडिटोरियम और हरित ऊर्जा संयंत्र शामिल किए गए हैं। इतने बड़े और ऐतिहासिक प्रोजेक्ट में इस तरह की बुनियादी निर्माण संबंधी खामियों का उजागर होना बेहद चिंताजनक है।
भविष्य की सुरक्षा और सीख
यह हादसा भले ही किसी जनहानि के बिना टल गया हो, लेकिन इसने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को एक बड़ा सबक दिया है। किसी भी सार्वजनिक या सरकारी इमारत के निर्माण में केवल बाहरी भव्यता ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि वहां मौजूद रहने वाले लोगों की जान-माल की सुरक्षा सबसे प्राथमिक विषय होना चाहिए। यदि समय रहते पूरे विधानसभा परिसर का स्ट्रक्चरल ऑडिट (ढांचागत सुरक्षा जांच) नहीं कराया गया, तो भविष्य में किसी बड़े सत्र या महत्वपूर्ण वीआईपी कार्यक्रम के दौरान इस प्रकार की लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रशासन को केवल एक कमरे की मरम्मत कराकर मामले को दबाने के बजाय पूरे परिसर की सभी छतों, सीलिंग्स, इलेक्ट्रिक फिटिंग्स और ओवरहेड स्ट्रक्चर्स की सुरक्षा जांच किसी स्वतंत्र और प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान से करानी चाहिए। साथ ही, जब तक सक्षम प्राधिकारी से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और फायर एनओसी जैसी अनिवार्य अनुमतियां प्राप्त न हों, तब तक सुरक्षा के मानकों पर कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।







