कोण्डागांव/रायपुर, 23 जुलाई। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय (सिविल अपील संख्या 1385/2025) के बाद देशभर के लगभग 25 लाख शिक्षकों के सामने सेवा सुरक्षा और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
प्रभावित शिक्षकों की ओर से शिक्षक प्रतिनिधि रामचंद सोनवंशी ने माननीय राष्ट्रपति, भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय एवं संसद से इस विषय में तत्काल हस्तक्षेप कर स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
उन्होंने बताया कि RTE अधिनियम, 2009 के मूल प्रावधानों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का कोई उल्लेख नहीं था। वहीं, NCTE की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के पैरा-4 में स्पष्ट रूप से 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट प्रदान की गई थी।
शिक्षकों का कहना है कि किसी भी सरकारी सेवा में 20–30 वर्ष तक कार्य करने के बाद बीच सेवा अवधि में नई पात्रता परीक्षा अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि RTE संशोधन अधिनियम, 2017 में केवल व्यावसायिक प्रशिक्षण (Professional Training) का उल्लेख किया गया था, TET को अनिवार्य नहीं बनाया गया था।
शिक्षक प्रतिनिधियों के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को मिली छूट समाप्त होने और 1 सितंबर 2028 तक आवश्यक पात्रता पूरी नहीं करने की स्थिति में सेवामुक्ति की आशंका ने लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
प्रमुख मांगें
संसद द्वारा RTE अधिनियम में संशोधन अथवा अध्यादेश लाकर 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से मिली छूट को स्थायी कानूनी संरक्षण दिया जाए।
सभी पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवाओं को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए।
लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए मानवीय एवं संवैधानिक आधार पर स्थायी समाधान निकाला जाए।
शिक्षक प्रतिनिधियों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर 4 अप्रैल 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल शिक्षक रैली, विभिन्न जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन तथा लगातार लोकतांत्रिक माध्यमों से मांग उठाई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय और संसद से शीघ्र हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि यदि समय रहते कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो देशभर के प्रभावित शिक्षक लोकतांत्रिक तरीके से जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन और अनशन करने के लिए बाध्य होंगे।
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“23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त 25 लाख शिक्षकों पर नौकरी का संकट, TET से छूट के लिए केंद्र सरकार से संसद में संशोधन की मांग”







