सोमन साहू/आरंग-
देश में लगातार गहराते शैक्षणिक, आर्थिक और प्रशासनिक संकट के बीच अब आम जनता और युवाओं के सब्र का पैमाना पूरी तरह छलक चुका है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ संयोजक मंडल सदस्य किसान नेता पारस साहू एवं गजेंद्र सिंह कोसले ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और संसद के सभी विपक्षी सांसदों को एक अत्यंत कड़ा एवं ऐतिहासिक ज्ञापन प्रेषित कर केंद्र सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया गया है। देश के युवाओं, किसानों, मजदूरों और महिलाओं की ओर से भेजे गए इस पत्र में गंभीर आरोप लगाया गया है कि देश में वर्तमान में लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संवैधानिक नियमों को ताक पर रख दिया गया है। बिगड़ते हालातों को देखते हुए युवाओं ने राष्ट्रपति से केंद्रीय मंत्रिमंडल और लोकसभा को तत्काल प्रभाव से भंग कर देश में बैलेट पेपर के माध्यम से निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव कराने की गुहार लगाई है।
देश के शैक्षणिक माहौल पर चिंता जताते हुए पत्र में शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को रेखांकित किया गया है। नीट परीक्षा में धांधली और लगातार हो रहे पेपर लीक के कारण 16 से अधिक होनहार अभ्यर्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देश भर में जारी आक्रोश के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से अनशन पर बैठे वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के साथ हुई खींचतान और अभद्रता ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर बिना नेम-प्लेट वाली पुलिस और आरएएफ द्वारा लोहे की कीलों वाली लाठियों, छर्रे वाली गन और आंसू गैस का प्रयोग किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस दौरान छात्राओं के साथ हुई बदसलूकी और बैरिकेड्स में करंट छोड़े जाने की शिकायतों ने राजधानी की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजधानी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था संभालने में गृह मंत्री अमित शाह की नाकामी का जिक्र करते हुए पत्र में आरोप लगाया गया है कि निहत्थे छात्रों पर अत्याचार करने के लिए असंवैधानिक तरीकों का सहारा लिया जा रहा है। डीसीपी स्तर के पुलिस अधिकारियों द्वारा महिलाओं को थप्पड़ जड़ने की घटनाओं के वीडियो सामने आने से जन-आक्रोश और भड़क गया है। वहीं दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के तथाकथित बयानों से भी युवाओं में भारी निराशा व्याप्त है। युवाओं का आरोप है कि संवैधानिक अधिकारों के हनन पर जब वे न्याय की गुहार लगाने कोर्ट पहुंचते हैं, तो उनके खिलाफ हुई पुलिस बर्बरता के साक्ष्यों को देखने से यह कहकर मना कर दिया जाता है कि अदालत का समय बर्बाद न किया जाए।प्रधानमंत्री निवास से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर चल रहे इस व्यापक आंदोलन पर सरकार की चुप्पी को सत्ता का अहंकार करार दिया गया है। डेढ़ महीने से उठ रही मांगों पर प्रधानमंत्री की ओर से कोई जवाबदेही तय न होने से युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इधर, देश की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यकाल में लगातार गिरते रुपये, बेकाबू होती महंगाई और रिकॉर्ड बेरोजगारी पर कड़ा हमला बोला गया है।
पत्र में पीएम नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री काल के उस पुराने बयान का भी स्मरण कराया गया है जिसमें उन्होंने रुपये की गिरती साख के लिए केंद्र सरकार की अक्षमता को जिम्मेदार ठहराया था।परिवहन एवं पेट्रोलियम मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि दावों के विपरीत पहली ही बारिश में नई बनी सड़कें और पुल ध्वस्त हो रहे हैं। शुद्ध पेट्रोल के दाम ₹167 के पार पहुंच चुके हैं, वहीं जबरन थोपे गए E-20 ईंधन के कारण आम नागरिकों की गाड़ियों के इंजन समय से पहले खराब हो रहे हैं। कृषि मोर्चे पर भी सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। किसानों को समय पर खाद और बिजली नहीं मिल पा रही है, और सैकड़ों किसानों के बलिदान के बावजूद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी का वादा आज भी अधूरा पड़ा हुआ है।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर ट्रस्ट के नाम पर भ्रष्टाचार कर देश की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। विपक्षी नेताओं को डराने के लिए ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का धड़ल्ले से दुरुपयोग हो रहा है, जबकि सत्ताधारी दल में शामिल होते ही नेताओं के केस बंद कर दिए जाते हैं। पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अडाणी जैसी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए जंगलों और पहाड़ों को काटकर आदिवासियों को बेघर किया जा रहा है। इसके अलावा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में जवानों की शहादत पर दिए गए विरोधाभासी बयानों और ‘अग्निवीर’ जैसी योजनाओं को सेना का मनोबल गिराने और कॉरपोरेट घरानों के लिए प्राइवेट आर्मी तैयार करने की साजिश करार दिया गया है।
तत्काल प्रभाव से लोकसभा भंग हो: देश को गहराते संवैधानिक संकट से उबारने के लिए वर्तमान केंद्रीय मंत्रिमंडल और संसद को तुरंत बर्खास्त किया जाए।इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के प्रति जनता का विश्वास खत्म हो चुका है, इसलिए पारदर्शी लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए चुनाव केवल बैलेट पेपर से कराए जाएं।जन-समस्याओं पर जवाबदेही तय हो: छात्र आत्महत्या, पेपर लीक, महंगाई, स्मार्ट मीटर की लूट और प्रशासनिक तानाशाही के जिम्मेदार मंत्रियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।देश भर में स्मार्ट मीटरों के नाम पर हो रही दोगुनी-तिगुनी बिजली बिल की वसूली, जगह-जगह खोली जा रही सरकारी शराब दुकानों से बढ़ती नशाखोरी और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों से जनता बेहाल है। रायपुर की धरती से उठी इस मांग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही जनहित में बड़े फैसले नहीं लिए गए, तो यह आक्रोश एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन का रूप धारण कर लेगा।







