विमल सोनी/बिलासपुर। बारिश के मौसम में खूंटाघाट डैम का वेस्ट वियर जब पूरे शबाब पर होता है और पानी तेज बहाव के साथ छलकता है, तब यहां पर्यटकों की भीड़ भी बढ़ जाती है। लेकिन पर्यटन के इस आकर्षण के बीच सुरक्षा व्यवस्था का अभाव गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। वेस्ट वियर के ऊपर बने पुल और बहते पानी के आसपास युवा, बच्चे और अन्य पर्यटक बेखौफ होकर दौड़ते, उछलते और पानी के बेहद करीब पहुंचते नजर आते हैं। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

सबसे गंभीर बात यह है कि मौके पर न तो पर्याप्त सुरक्षाकर्मी दिखाई देते हैं, न पुलिस की तैनाती नजर आती है और न ही जल संसाधन विभाग की ओर से ऐसी व्यवस्था दिखती है, जो पर्यटकों को खतरनाक क्षेत्र में जाने से रोक सके। तेज बहाव वाले वेस्ट वियर पर महज लोगों की समझदारी और सावधानी के भरोसे सुरक्षा छोड़ देना किसी बड़ी अनहोनी को न्योता देने जैसा है।
चार साल पुरानी घटना से भी नहीं लिया सबक
खूंटाघाट वेस्ट वियर में करीब चार वर्ष पहले एक युवक तेज पानी के बहाव में फंस गया था। बताया जाता है कि वह पूरी रात पानी के बीच फंसा रहा और बाद में सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से उसका रेस्क्यू किया गया। उस घटना ने यहां की खतरनाक परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को स्पष्ट कर दिया था। इसके बावजूद बारिश के मौसम में हर साल जब पानी का बहाव तेज होता है और पर्यटकों की भीड़ बढ़ती है, तब सुरक्षा इंतजामों की कमी फिर सामने आ जाती है।
जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल
वेस्ट वियर और बांध क्षेत्र जल संसाधन विभाग के अधीन होने के कारण यहां सुरक्षा को लेकर विभाग की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। तेज बहाव के दौरान खतरनाक स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, प्रतिबंधित क्षेत्र की स्पष्ट पहचान और पर्याप्त निगरानी जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं। इसके साथ ही जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित गोताखोर या होमगार्ड की तैनाती की जानी चाहिए।
सवाल यह है कि जब विभाग को मालूम है कि जुलाई-अगस्त में खूंटाघाट में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है और वेस्ट वियर में पानी का बहाव खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है, तो स्थायी अथवा मौसमी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की जाती?
पुलिस प्रशासन की निगरानी भी जरूरी
पुलिस प्रशासन की भूमिका भी केवल किसी घटना के बाद रेस्क्यू या कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भीड़ वाले दिनों और अवकाश के दौरान पुलिस या होमगार्ड के जवानों की निगरानी से लोगों को खतरनाक हिस्सों में जाने से रोका जा सकता है। खासकर बच्चों और युवाओं को पानी के बहाव के ऊपर बने पुल पर उछल-कूद करने से रोकना बेहद जरूरी है।
प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वेस्ट वियर के किन हिस्सों में पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित है और इन प्रतिबंधों का पालन कराने के लिए मौके पर क्या व्यवस्था की गई है। यदि कोई लिखित दिशा-निर्देश जारी हैं, तो उनका मौके पर प्रभावी पालन भी दिखाई देना चाहिए।
हादसे के बाद जागने के बजाय पहले हो इंतजाम
खूंटाघाट की खूबसूरती और बारिश में छलकता वेस्ट वियर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र जरूर है, लेकिन यही तेज बहाव किसी की जिंदगी भी लील सकता है। बच्चों, महिलाओं और युवाओं के लिए कुछ सेकंड की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन, जल संसाधन विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से यहां सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। वेस्ट वियर के संवेदनशील हिस्सों में बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, पुलिस/होमगार्ड की तैनाती और जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित गोताखोरों की व्यवस्था की जाए।







