मुंबई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर देखने को मिला।
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 284.85 अंक गिरकर 77,717.05 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 69.25 अंक की गिरावट के साथ 24,297.05 पर कारोबार करता नजर आया।
इन शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और भारतीय स्टेट बैंक में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और टाइटन के शेयरों में तेजी देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी बनी हुई है। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.43 फीसदी बढ़कर 88.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया के तनाव के बीच तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है।
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर
शेयर बाजार में गिरावट के बीच भारतीय रुपया भी शुरुआती कारोबार में कमजोर रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया 10 पैसे गिरकर 95.52 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन्हीं संकेतकों का असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।
इन शेयरों पर रहा दबाव
सेंसेक्स में शामिल प्रमुख शेयरों में इन्फोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और भारतीय स्टेट बैंक शुरुआती कारोबार में दबाव में रहे। हालांकि, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टाइटन के शेयरों में बढ़त देखने को मिली।
वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत
एशियाई बाजारों में तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही। जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। दूसरी ओर, अमेरिका के प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।
इस तरह वैश्विक बाजारों के मिले-जुले रुझान ने भी भारतीय बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। फिलहाल निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी हुई है।







