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स्कूलों में पढ़ाई से ज्यादा दिखावे पर नहीं चलेगा जोर, शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को दी सख्त हिदायत गजेंद्र यादव बोले- शिक्षकों की समस्याओं पर सरकार कर रही विचार, लेकिन बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं; स्कूलों में अनावश्यक बाहरी दखल पर भी लगाम

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर मंगलवार को हुई राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अधिकारियों के सामने कई अहम मुद्दे उठाए। राजधानी रायपुर के दीनदयाल ऑडिटोरियम में हुई बैठक में प्रदेश की शैक्षणिक व्यवस्था, शिक्षकों की उपस्थिति, स्कूलों की निगरानी, डिजिटल शिक्षा और लंबित विभागीय मामलों की समीक्षा की गई।

मंत्री ने साफ संदेश दिया कि स्कूलों का प्राथमिक उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए। प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी हो कि उसका सीधा फायदा विद्यार्थियों को मिले।

शिक्षकों के आंदोलन पर भी मंत्री का रुख सामने आया

प्रदेश में शिक्षकों की विभिन्न मांगों और TET से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं को लेकर गंभीर है। इसी बीच शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। 26 अगस्त को शिक्षक प्रतिनिधियों के साथ बैठक प्रस्तावित है, जिसमें सेवा सुरक्षा और TET से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी है।
मंत्री की ओर से यह संकेत भी दिया गया है कि दूसरे राज्यों में अपनाए जा रहे विकल्पों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के हित में संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।

प्राचार्यों से कहा- केबिन नहीं, स्कूल की कक्षाओं पर दें ध्यान

समीक्षा के दौरान स्कूलों के संचालन और प्राचार्यों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। मंत्री ने अधिकारियों को यह संदेश दिया कि स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों और स्थान का इस्तेमाल विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों के हिसाब से होना चाहिए।

स्कूलों में प्राचार्य और प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विद्यालय की प्राथमिकता बच्चों की कक्षाओं की जगह कार्यालयीन सुविधाएं बन जाएं।
मंत्री ने अधिकारियों को स्कूलों की वास्तविक स्थिति पर नजर रखने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में हो।

स्कूलों में अनावश्यक यूट्यूबरों की एंट्री पर रोक

बैठक में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों की आवाजाही का रहा। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनावश्यक रूप से यूट्यूब चैनल चलाने वाले लोगों या अन्य बाहरी व्यक्तियों को स्कूल परिसर में प्रवेश की अनुमति न दी जाए।
स्कूल में किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए निर्धारित नियमों और अनुमति प्रक्रिया का पालन जरूरी होगा। इसका उद्देश्य स्कूल के शैक्षणिक माहौल को बनाए रखना और विद्यार्थियों की निजता व सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखना है।

ऑनलाइन अटेंडेंस की होगी निगरानी

शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर भी विभाग ने सख्ती का संकेत दिया है। VSK App समेत विभागीय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपस्थिति और पंजीयन की व्यवस्था की समीक्षा की गई।
मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सिर्फ ऑनलाइन सिस्टम शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मैदानी स्तर पर उसकी नियमित निगरानी भी जरूरी है। स्कूल से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की बात भी सामने आई है।

सरकारी स्कूलों में बढ़े विद्यार्थियों की संख्या

बैठक के बाद मंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में इस साल सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इसे सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों के बढ़ते भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
विभाग अब डिजिटल माध्यमों के जरिए विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रहा है। स्मार्ट क्लास और शैक्षणिक चैनलों के माध्यम से पढ़ाई को और प्रभावी बनाने की योजना पर जोर दिया जा रहा है।

स्मार्ट क्लास बनी तो इस्तेमाल भी होना चाहिए

समीक्षा में केवल स्कूलों में संसाधन उपलब्ध कराने के बजाय उनके वास्तविक उपयोग पर जोर दिया गया। स्मार्ट क्लास, आईसीटी उपकरण और अन्य डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल नियमित रूप से कक्षा शिक्षण में हो, इस पर अधिकारियों को ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री ने विभागीय योजनाओं के तहत मिलने वाले बजट के सही और उद्देश्यपूर्ण इस्तेमाल को भी प्राथमिकता देने की बात कही।

मंत्री का फोकस साफ- स्कूल में सबसे पहले बच्चे और पढ़ाई

पूरी समीक्षा बैठक से यह संकेत मिला कि स्कूल शिक्षा विभाग अब उपस्थिति, जवाबदेही, डिजिटल निगरानी और शैक्षणिक गुणवत्ता को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहता है। अधिकारियों को लंबित मामलों के समयबद्ध निराकरण और विभागीय योजनाओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

यानी आने वाले समय में स्कूलों में केवल व्यवस्था दिखना नहीं, बल्कि उसका असर बच्चों की पढ़ाई में दिखाई देना विभाग की बड़ी प्राथमिकता होगी।

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