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तिब्बत से अचानक आया सैलाब, नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही; बिहार की नदियों पर भी बढ़ी निगरानी

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काठमांडू/पटना। तिब्बत की ओर से अचानक आए तेज जलप्रवाह ने नेपाल के उत्तरी हिस्से में भारी तबाही मचा दी है। रसुवा जिले के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण कई बस्तियां, सड़कें, पुल, वाहन और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

अचानक बढ़ा नदी का जलस्तर
बुधवार सुबह भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ा। पानी का बहाव इतना तेज था कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। तिमुरे बाजार और सीमा शुल्क क्षेत्र में खड़े कई वाहन और सामान पानी के तेज बहाव में बह गए। हाल में बनाया गया एक पुल भी बाढ़ की चपेट में आकर टूट गया।

बाढ़ का असर सिर्फ रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं रहा। कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और हाइड्रोपावर साइट्स को भी नुकसान पहुंचा है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार प्रभावित क्षेत्र में करीब 430 मेगावाट की बिजली उत्पादन क्षमता से जुड़ी परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।

गांव और पुलिस चौकियां भी प्रभावित
रसुवा के तिमुरे, स्याफ्रुबेसी समेत आसपास के इलाकों में बाढ़ और मलबे ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई जगहों पर सड़क संपर्क बाधित हुआ है। नेपाल पुलिस की कुछ चौकियों और कार्यालयों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें तैनात की गई हैं।

हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू में भी परेशानी
हालात इतने खराब हैं कि कई प्रभावित स्थानों पर हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग मुश्किल हो गई है। तेज पानी और मलबे के कारण सुरक्षित लैंडिंग स्पॉट उपलब्ध नहीं होने की खबर है। नेपाल में राहत दल प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं।

पांच जिलों में हाई अलर्ट
बाढ़ के पानी के आगे बढ़ने की आशंका को देखते हुए नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जिलों में नदी किनारे रहने वाले लोगों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने लोगों से नदियों और निचले इलाकों से दूरी बनाए रखने की अपील की है।

बिहार तक बढ़ी चिंता
भोटे कोशी नदी आगे चलकर त्रिशूली नदी से जुड़ती है और इसका जलप्रवाह भारत में गंडक नदी तंत्र तक पहुंचता है। इसी वजह से बिहार में भी नदियों के जलस्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है। खासकर गंडक और बूढ़ी गंडक के आसपास के इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।

ग्लेशियल झील से जुड़ी आशंका
अचानक आई बाढ़ के कारणों की जांच जारी है। शुरुआती रिपोर्टों में सामान्य बारिश के बजाय तिब्बत क्षेत्र से अचानक आए जलप्रवाह की बात सामने आई है। विशेषज्ञों ने ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियर झील के अचानक फटने जैसी घटना की संभावना पर भी ध्यान दिया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

*फिलहाल नेपाल में राहत-बचाव अभियान जारी है और प्रशासन नदियों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से लगातार सतर्क रहने की अपील कर रहा है।*

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