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DMF में ‘बंदरबांट’ का आरोप! 1.93 करोड़ की बर्न यूनिट की निविदा पर उठे सवाल

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-मैन्युअल टेंडर प्रक्रिया को लेकर ठेकेदार संघ ने जताई आपत्ति; जगदलपुर के ठेकेदार को काम दिए जाने का आरोप

-जनसंपर्क विभाग को निविदा की प्रति नहीं देने का दावा, पारदर्शिता पर भी सवाल; DMF कार्यों में एजेंसी चयन की जांच की मांग

रिकेश्वर राणा/दंतेवाड़ा। जिला खनिज न्यास (DMF) की राशि से कराए जा रहे करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और निविदा प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग से जुड़े करीब 1 करोड़ 93 लाख रुपये की लागत वाले बर्न यूनिट निर्माण कार्य की निविदा को लेकर ठेकेदार संघ के जिला अध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

ठेकेदार संघ का आरोप है कि करोड़ों रुपये के इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य के लिए ऑनलाइन टेंडर की जगह मैन्युअल निविदा प्रक्रिया अपनाई गई और कथित तौर पर एक पसंदीदा ठेकेदार को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि मामले में मौखिक शिकायत किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने समय रहते संज्ञान नहीं लिया।

बताया गया है कि इस संबंध में पत्र क्रमांक 2979, मु.चि.अ. के माध्यम से निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। आरोप के मुताबिक जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय रामटेके के स्तर से मैन्युअल तरीके से निविदा जारी कराई गई, जिसके बाद यह कार्य जगदलपुर के एक ठेकेदार को दिए जाने की बात सामने आई है।

निविदा के प्रचार-प्रसार को लेकर भी सवाल

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल निविदा के सार्वजनिक प्रचार-प्रसार को लेकर उठाया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि निविदा की प्रति जनसंपर्क विभाग को उपलब्ध नहीं कराई गई और प्रक्रिया से संबंधित पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी भी सामने नहीं आई।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब करीब दो करोड़ रुपये की सरकारी एवं DMF राशि से महत्वपूर्ण निर्माण कार्य कराया जाना हो, तब निविदा प्रक्रिया में अधिकतम पारदर्शिता और व्यापक सार्वजनिक सूचना सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। संवाद नंबर अथवा पर्याप्त सार्वजनिक सूचना के अभाव को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

DMF के कार्यों में एजेंसी चयन भी सवालों के घेरे में

विवाद केवल बर्न यूनिट की निविदा तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ताओं ने DMF से स्वीकृत अन्य निर्माण कार्यों में एजेंसी चयन को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

आरोप है कि अपेक्षाकृत कम राशि वाले निर्माण कार्य PWD को हैंडओवर किए जा रहे हैं, जबकि अधिक राशि वाले कार्यों के लिए संबंधित विभाग स्वयं निर्माण एजेंसी की भूमिका में आ रहा है। शिकायतकर्ताओं ने इसे DMF राशि के उपयोग और कार्यों के आवंटन में असमानता बताते हुए इसकी जांच की मांग की है।

5 प्रतिशत राशि लिए जाने के आरोप की भी जांच की मांग

टेंडर प्रक्रिया को लेकर यह आरोप भी सामने आया है कि ठेकेदार से 5 प्रतिशत की पूरी राशि लिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि यदि ऐसा हुआ है तो इसकी भी दस्तावेजों के आधार पर जांच की जाए, ताकि पूरी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता स्पष्ट हो सके।

अधिकारी के कार्यकाल की निविदाओं की जांच की मांग

ठेकेदार संघ ने संबंधित अधिकारी के पदभार ग्रहण करने के बाद जारी की गई निविदाओं और सप्लाई संबंधी कार्यों की भी जांच की मांग की है। आरोप लगाया गया है कि इसी तरह की प्रक्रिया के माध्यम से लगातार निविदा एवं सप्लाई के कार्य किए जा रहे हैं और कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

मामले में शिकायतकर्ताओं ने 1.93 करोड़ रुपये की बर्न यूनिट की निविदा, पत्र क्रमांक 2979, अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया, ठेकेदार चयन तथा DMF कार्यों में एजेंसी निर्धारण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित निविदा के दस्तावेज, प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड और विभागीय निर्णयों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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