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आरंग की सांस्कृतिक संस्था “दूज के चंदा” ने खड़सा (सिरपुर) के इतवारी महोत्सव में बिखेरा छत्तीसगढ़ी लोक कला का जादू, दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

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-आरंग की सांस्कृतिक संस्था “दूज के चंदा” ने खड़सा (सिरपुर) के इतवारी महोत्सव में बिखेरा छत्तीसगढ़ी लोक कला का जादू, दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

आरंग/महासमुंद: ग्राम पंचायत खड़सा (सिरपुर), जिला महासमुंद में आयोजित ‘इतवारी महोत्सव’ के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक लोक धरोहर संस्था “दूज के चंदा” (बैहार, आरंग, जिला रायपुर) द्वारा एक बेहद सफल और धमाकेदार प्रस्तुति दी गई। इस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में संस्था के कलाकारों ने अपनी जीवंत कला से उपस्थित जनसमुदाय का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम में उपस्थित माता-बहनों, ग्राम विकास समिति के पदाधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित भारी संख्या में मौजूद दर्शकों ने प्रस्तुति की खूब सराहना की। संस्था के सुमधुर गीत-संगीत और विशेष रूप से ‘जस गौरी-गौरा’ की सजीव एवं भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

यह पूरी प्रस्तुति संस्था के संचालक श्री जोगेंदर सिंह ठाकुर के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुई। कार्यक्रम के माध्यम से श्री खोमन लाल साहू के संगीत की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने का सराहनीय प्रयास किया गया। वहीं, प्रस्तुति के भाव पक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हेमन्त ठाकुर एवं साथी ने बखूबी निभाई।

इस सफल आयोजन को धरातल पर उतारने के लिए संस्था के सभी पदाधिकारियों और कलाकारों को विभिन्न दायित्व सौंपे गए थे, जिसका उन्होंने निष्ठापूर्वक निर्वहन किया।

इनकी रही गरिमामयी भूमिका और प्रस्तुतियाँ:

प्रबंधन एवं निर्देशन: संस्था संचालक श्री जोगेंदर सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में संगीत निर्देशन श्री खोमन लाल साहू ने किया। मंच संचालन दाऊ जीवन लाल साहू (कूकराडीह वाले) ने अपनी चिरपरिचित शैली में किया, जबकि रूपरेखा संयोजक डॉ. हेमन्त साहू और सहयोगी श्री कृष्ण कुमार यादव रहे।

मुख्य गायक-गायिकाएँ: मुख्य गायक डॉ. दाऊ लाल साहू, हारमोनियम वादक व गायक श्री श्याम लाल साहू, गायिका श्रीमती रीटा मतेलकर, श्रीमती स्वीकृति राजपूत और कु. पार्वती साहू की सुरीली आवाजों ने समां बांध दिया।

म्यूजिशियंस (वाद्यवृन्द): बांसुरी पर आचार्य गजेन्द्र तिवारी जी, तबला पर श्री याददास मानिकपुरी, ऑक्टोपैड पर श्री दीपक विश्वकर्मा, ऑर्गन पर श्री तेजराम घृतलहरें, बैंजो पर श्री तानसेन जी और नाल पर श्री सोनू मानिकपुरी के जुगलबंदी ने संगीत को जीवंत बना दिया।

महोत्सव के अंत में ग्राम विकास समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने “दूज के चंदा” कला मंच के समस्त कलाकारों और पदाधिकारियों को इस ऐतिहासिक और सफल प्रस्तुति के लिए बधाई व शुभकामनाएं दीं।

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