Home चर्चा में चांपा रेल्वे प्रशासन की हठधर्मिता के कारण गरीब परिवारों उजड़े आशियाने

चांपा रेल्वे प्रशासन की हठधर्मिता के कारण गरीब परिवारों उजड़े आशियाने

11
0

-वार्ड नंबर 24 में बरसात में गरीबों के आशियाने पर चला बुलडोजर, 67 परिवार बेघर हो गया

-मिशन फाटक चांपा में रेलवे की कार्रवाई से मचा हड़कंप, पुनर्वास के बिना बेदखली पर शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल

जिला जांजगीर-चांपा चांपा। मिशन फाटक चांपा के पास करीब पांच दशक से झोपड़ीनुमा मकान बनाकर निवास कर रहे वार्ड नंबर 24 के लगभग 57 और वार्ड नंबर 17 के लगभग 10 कुल 67 मकानों गरीब परिवारों के आशियानों पर मंगलवार 8 सितंबर 2026 को सुबह करीब 10 बजे रेलवे प्रशासन की कार्रवाई ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया। बरसात के बीच अचानक बुलडोजर चलाए जाने से प्रभावित परिवारों के सामने सिर छिपाने तक का संकट खड़ा हो गया है।

बताया जाता है कि उक्त स्थान पर रहने वाले गरीब तबके के परिवार लगभग 50 वर्षों से निवासरत हैं। इस दौरान नगर पालिका परिषद चांपा द्वारा क्षेत्र में सड़क, नाली, बिजली सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इतना ही नहीं, नगर पालिका द्वारा इन परिवारों से समेकित कर/टैक्स की वसूली भी की जाती रही है। ऐसे में वर्षों तक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और कर वसूलने के बाद अचानक इन परिवारों के मकानों पर बुलडोजर चलाए जाने की कार्रवाई को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहले पुनर्वास, फिर विस्थापन की कार्रवाई क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण अथवा अन्य किसी वैधानिक कारण से इन परिवारों को हटाना आवश्यक था, तो क्या प्रभावित परिवारों के लिए पहले वैकल्पिक आवास एवं पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जानी चाहिए थी?

गरीब परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से इसी स्थान पर रहकर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। कई परिवारों की पीढ़ियां यहीं गुजर गईं। ऐसे में बरसात के मौसम में बिना पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था के मकानों को तोड़ना उनके सामने गंभीर मानवीय संकट पैदा कर सकता है।

शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल
सरकार गरीबों के लिए आवास, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं की बात करती है। दूसरी ओर यदि दशकों से बसे परिवारों को बारिश के बीच अचानक बेघर कर दिया जाता है, तो यह शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है।

यदि प्रशासन के पास इस भूमि को लेकर कोई वैधानिक कार्रवाई आवश्यक थी, तो प्रभावित परिवारों को पहले विधिवत सूचना, सुनवाई का अवसर तथा वैकल्पिक आवास की व्यवस्था उपलब्ध कराना ज्यादा मानवीय और न्यायसंगत कदम होता।

बुलडोजर चलाना आसान है, लेकिन उजड़े परिवारों को दोबारा बसाना आसान नहीं। एक गरीब परिवार का मकान केवल टीन, लकड़ी, मिट्टी या ईंटों से बना ढांचा नहीं होता, बल्कि उसमें उसकी वर्षों की मेहनत, बच्चों का भविष्य और परिवार की पूरी जिंदगी जुड़ी होती है।

पुनर्वास नीति के तहत तत्काल हो व्यवस्था

प्रभावित परिवारों की मांग है कि शासन-प्रशासन तत्काल मौके का संज्ञान लेते हुए रेलवे प्रशासन की कार्रवाई की समीक्षा करे तथा छत्तीसगढ़ की प्रचलित पुनर्वास नीति एवं लागू वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पात्र प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास/बसाहट की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
साथ ही जिन परिवारों के मकान तोड़े गए हैं, उनके रहने, भोजन और आवश्यक सुरक्षा की तत्काल व्यवस्था की जानी चाहिए।

बरसात के इस मौसम में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को खुले आसमान के नीचे छोड़ देना किसी भी संवेदनशील व्यवस्था के लिए उचित नहीं हो सकता।

जिला कलेक्टर और स्थानीय प्रशासन तत्काल संज्ञान ले
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन, नगर पालिका परिषद चांपा तथा संबंधित रेलवे अधिकारियों को संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना चाहिए। वर्षों से निवास, नगर पालिका की ओर से उपलब्ध कराई गई मूलभूत सुविधाओं तथा कर वसूली से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच होनी चाहिए।
सवाल सिर्फ जमीन का नहीं, इंसानियत का भी है। विकास और सार्वजनिक परियोजनाओं के नाम पर यदि गरीब परिवारों को विस्थापित किया जाना आवश्यक हो, तो उनके अधिकारों और पुनर्वास की जिम्मेदारी भी शासन-प्रशासन की होनी चाहिए।

प्रशासन से मांग—पहले बसाहट, फिर विस्थापन
चांपा के मिशन फाटक क्षेत्र में हुई कार्रवाई को लेकर अब जरूरत है कि जिला प्रशासन मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे। प्रभावित परिवारों को अस्थायी राहत के साथ-साथ पात्रता के अनुसार स्थायी पुनर्वास एवं वैकल्पिक बसाहट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

बरसात में गरीब का घर तोड़ना कार्रवाई हो सकती है, लेकिन उसके उजड़े परिवार को छत देना ही असली प्रशासनिक संवेदनशीलता की पहचान होगी।

ब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मानवीय मामले में तत्काल संज्ञान लेकर प्रभावित करीब 67 परिवारों के लिए क्या राहत और पुनर्वास व्यवस्था करता है।

वार्ड नंबर 24 के पार्षद कहना है कि
बरसात में गरीब परिवारों को मकान नहीं तोड़ना चाहिए क्योंकि किसी भी परिवार अभी बरसात में मकान बनाने के लिए कोई परिवार सक्षम नहीं है। अगर तोड़ना ही तो बरसात के पहले पुनर्वास नीति के तहत विस्थापन बसाहट व्यवस्था करनी उसके बाद तोड़ना था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here