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आवास के नाम पर ‘खेल’! पात्रों के नाम काटने और 10 हजार रुपये मांगने का आरोप

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युसूफ खान/कुसमी सामरी –

-बाटा पंचायत में सरपंच-सचिव व रोजगार सहायक पर ग्रामीणों के गंभीर आरोप, तिरपाल के नीचे रह रहे दिव्यांग का नाम भी सूची से हटाने का दावा

कुसमी (छत्तीसगढ़ वॉच ब्यूरो)। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर कुसमी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बाटा में ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत के सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक द्वारा कथित रूप से पात्र हितग्राहियों के नाम आवास योजना की सूची से हटाए गए तथा योजना का लाभ दिलाने और किस्त जारी कराने के नाम पर पैसों की मांग की गई।

ग्रामीणों के अनुसार, जिन हितग्राहियों ने कथित रूप से पैसे देने से इनकार किया, उनके नाम योजना से काटे जाने का आरोप है। वहीं कुछ हितग्राहियों को कथित तौर पर राजनीतिक समर्थन के आधार पर लाभ से वंचित किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

किस्त डलवाने के नाम पर 10 हजार रुपये लेने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एक हितग्राही से आवास की किस्त खाते में डलवाने के नाम पर कथित रूप से 10 हजार रुपये लिए गए। आरोप है कि राशि लेने के बावजूद संबंधित हितग्राही के खाते में किस्त जमा नहीं हुई। ग्रामीणों ने मामले में संबंधित हितग्राही के बयान तथा लेन-देन की जांच कराने की मांग की है।

रुपयों के साथ ‘मुर्गा’ लेने का भी आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर कुछ लोगों से कथित रूप से पैसे के अलावा मुर्गा भी लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजना के लाभ के बदले किसी प्रकार की राशि या सामान लिया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

तिरपाल के नीचे रह रहा दिव्यांग, फिर भी नाम कटने का दावा
मामले में सबसे गंभीर आरोप एक दिव्यांग हितग्राही को लेकर सामने आया है। ग्रामीणों के मुताबिक संबंधित दिव्यांग व्यक्ति आज भी तिरपाल के सहारे रहने को मजबूर है। इसके बावजूद उसका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची से हटाए जाने का दावा किया गया है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि अत्यंत जरूरतमंद और आवासविहीन व्यक्ति ही योजना के लाभ से वंचित रह जाए, तो योजना का वास्तविक उद्देश्य कैसे पूरा होगा? उन्होंने संबंधित हितग्राही की पात्रता और सूची से नाम हटाए जाने के कारणों की जांच की मांग की है।

सरपंच के जवाब से उठे सवाल
मामले को लेकर जब रिपोर्टर ने ग्राम पंचायत बाटा के सरपंच से प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची के संबंध में जानकारी मांगी, तो सरपंच ने कहा कि “अभी लिस्ट निकलवाऊंगा और देखूंगा कि किसका नाम कटा है।”
सरपंच के इस जवाब के बाद ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि पंचायत स्तर पर हितग्राहियों की सूची और उनके नाम की स्थिति स्पष्ट रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। ऐसे में नाम कटने की प्रक्रिया किस स्तर पर और किन कारणों से हुई, इसकी जांच जरूरी है।

सचिव से संपर्क का प्रयास, फोन नहीं उठाया
मामले में पंचायत सचिव का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया। ग्रामीणों ने सचिव के पंचायत में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

जनपद सीईओ ने कहा—जांच टीम गठित कर भेजी
मामले की जानकारी कुसमी जनपद पंचायत के सीईओ को दिए जाने पर उन्होंने बताया कि “जानकारी प्राप्त होते ही मैंने जांच टीम गठित कर जांच के लिए भेज दिया है।”

जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
ग्रामीणों ने प्रशासन से ग्राम पंचायत बाटा में प्रधानमंत्री आवास योजना की हितग्राही सूची, पात्रता सूची, नाम हटाए जाने के कारण, स्वीकृत आवास, किस्तों के भुगतान तथा कथित लेन-देन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अब प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम की रिपोर्ट पर निगाहें टिकी हैं।दस्तावेजों की जांच, हितग्राहियों के बयान और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी ग्रामीणों ने की है।

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